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DU में विरोध-प्रदर्शन के लिए नया नियम: 72 घंटे पहले देनी होगी सूचना, छात्रों ने जताया विरोध

नई दिल्ली, डेस्क | वेब वार्ता

दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) प्रशासन ने परिसर में विरोध-प्रदर्शन और सभाओं को लेकर नया निर्देश जारी किया है। अब किसी भी तरह के प्रदर्शन, धरना या जुलूस के लिए आयोजकों को कम से कम 72 घंटे पहले विश्वविद्यालय प्रशासन और स्थानीय पुलिस को सूचना देना अनिवार्य होगा। इस फैसले ने परिसर में नई बहस छेड़ दी है और छात्र संगठनों ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताया है।

क्या है नया नियम?

नियमविवरण
पूर्व सूचना72 घंटे पहले देना अनिवार्य
सूचना कहां देनी होगीप्रॉक्टर कार्यालय और स्थानीय पुलिस
लागू क्षेत्रछात्र, शिक्षक, कर्मचारी सभी
ऑनलाइन सूचनामान्य नहीं (केवल हार्ड कॉपी)

विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि किसी भी कार्यक्रम की अनुमति के लिए आयोजकों को विस्तृत जानकारी देनी होगी, जिसमें कार्यक्रम का स्वरूप, वक्ताओं की सूची और प्रतिभागियों की संख्या शामिल होगी।

क्या-क्या जानकारी देना जरूरी?

प्रॉक्टर कार्यालय के अनुसार, आवेदन में निम्नलिखित विवरण अनिवार्य रूप से शामिल करना होगा:

  • आयोजक का नाम और कॉलेज/विभाग
  • संपर्क विवरण
  • कार्यक्रम की प्रकृति और अवधि
  • वक्ताओं की सूची
  • प्रतिभागियों की अनुमानित संख्या

बाहरी लोगों की एंट्री पर रोक

नोटिस में यह भी स्पष्ट किया गया है कि विश्वविद्यालय परिसर में किसी भी कार्यक्रम के दौरान बाहरी व्यक्तियों को बुलाने या शामिल करने की अनुमति नहीं होगी। नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

उल्लंघन पर क्या होगी कार्रवाई?

उल्लंघनसंभावित कार्रवाई
बिना अनुमति प्रदर्शनअनुशासनात्मक कार्रवाई
नियमों का उल्लंघननिष्कासन / नामांकन रद्द
गंभीर मामलापुलिस कार्रवाई

छात्र संगठनों का विरोध

छात्र संगठनों ने इस आदेश को “परमिशन राज” करार देते हुए कड़ा विरोध जताया है। उनका कहना है कि यह कदम छात्रों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार को सीमित करता है। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस प्रशासन के खिलाफ विरोध होता है, उसी से अनुमति लेना तर्कसंगत नहीं है।

  • आदेश को अलोकतांत्रिक बताया
  • अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सवाल
  • आदेश वापस लेने की मांग

शिक्षकों और विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया

विश्वविद्यालय के कुछ शिक्षकों ने भी इस आदेश की आलोचना करते हुए इसे लोकतांत्रिक अधिकारों के खिलाफ बताया है। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय संवाद और विचारों के आदान-प्रदान का स्थान होता है, न कि नियंत्रण और प्रतिबंध का।

निष्कर्ष

दिल्ली विश्वविद्यालय का यह नया नियम परिसर में व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है, लेकिन इससे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन और छात्र संगठनों के बीच इस मुद्दे पर क्या समाधान निकलता है।


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