पुणे, डेस्क | वेब वार्ता
महाराष्ट्र के पुणे जिले के ससवाड इलाके में रमजान के दौरान रोजा खोलने की तैयारी कर रहे मुस्लिम युवकों के एक समूह पर कथित रूप से भीड़ द्वारा हमला किए जाने का मामला सामने आया है। शुक्रवार शाम करीब 6:30 बजे अस्करवाड़ी क्षेत्र में एक तालाब के पास हुई इस घटना में कम से कम 4 से 5 युवक घायल हो गए। पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज कर 10 से 15 संदिग्धों को हिरासत में लिया है और जांच जारी है।
तालाब किनारे रोजा खोलने की तैयारी के दौरान हुआ हमला
पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार, फिरोज जावेद सैयद अपने लगभग 10 दोस्तों के साथ तालाब के पास रोजा खोलने (इफ्तार) की तैयारी कर रहे थे। इसी दौरान करीब 100 लोगों का एक समूह मोटरसाइकिलों पर वहां पहुंचा और युवकों से पूछताछ शुरू कर दी। आरोप है कि भीड़ ने उनसे पूछा कि क्या यह जगह उनकी है, उन्हें टोपी उतारने को कहा और उनके पहनावे पर भी सवाल उठाए।
गाली-गलौज के बाद लाठी और धारदार हथियारों से हमला
शिकायतकर्ता के मुताबिक, पूछताछ के बाद विवाद बढ़ गया और भीड़ ने कथित रूप से युवकों के साथ गाली-गलौज करते हुए उन पर हमला कर दिया। हमले में लाठियों और धारदार हथियारों का इस्तेमाल किया गया, जिससे 4 से 5 युवक घायल हो गए। स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को तुरंत पास के अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद कुछ को छुट्टी दे दी गई, जबकि कुछ को आगे इलाज के लिए अन्य अस्पतालों में भेजा गया।
- घटना का समय: शुक्रवार शाम लगभग 6:30 बजे
- स्थान: अस्करवाड़ी, ससवाड (पुणे ग्रामीण)
- घायल: 4 से 5 युवक
पुलिस ने दर्ज किया मामला, संदिग्ध हिरासत में
इस मामले में ससवाड पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 118(1), 189(2), 190 समेत अन्य संबंधित धाराओं और शस्त्र अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। ससवाड पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ निरीक्षक कुमार कदम ने जानकारी दी कि अब तक 10 से 15 संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है और अन्य आरोपियों की पहचान कर गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं।
घटना का सामाजिक प्रभाव और सुरक्षा पर सवाल
यह घटना धार्मिक संवेदनशीलता और सामाजिक सौहार्द के संदर्भ में गंभीर चिंता का विषय बन गई है। रमजान जैसे पवित्र महीने में इफ्तार के दौरान हुए इस हमले ने स्थानीय प्रशासन और कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस का कहना है कि क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया गया है और किसी भी तरह की अफवाह या तनाव को रोकने के लिए निगरानी बढ़ा दी गई है।
निष्कर्ष
पुणे के ससवाड में हुई यह घटना न केवल कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती है, बल्कि सामाजिक सौहार्द के लिए भी खतरे का संकेत देती है। पुलिस द्वारा त्वरित कार्रवाई और आरोपियों की गिरफ्तारी की प्रक्रिया जारी है, लेकिन इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए दीर्घकालिक सामाजिक और प्रशासनिक उपाय आवश्यक हैं।
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