पश्चिम बंगाल में 5 नए सांस्कृतिक-विकास बोर्ड बनेंगे: ममता बनर्जी की घोषणा

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कोलकाता, डेस्क | वेब वार्ता

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को राज्य में सामाजिक और सांस्कृतिक विकास को बढ़ावा देने के लिए बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पांच नए सांस्कृतिक एवं विकास बोर्ड गठित करेगी, जिनका उद्देश्य विशेष समुदायों की परंपराओं की रक्षा करने के साथ-साथ उनके सामाजिक-आर्थिक विकास को गति देना है। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट कर बताया कि ये बोर्ड मुंडा, कोरा, डोम, कुम्भकार और सदगोप समुदायों के लिए बनाए जाएंगे, जिससे शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में इन समुदायों को बेहतर अवसर मिल सकेंगे।

पांच समुदायों के लिए बनाए जाएंगे विशेष बोर्ड

समुदायवर्गप्रस्तावित बोर्ड का उद्देश्य
मुंडाअनुसूचित जनजाति (ST)सांस्कृतिक संरक्षण और सामाजिक विकास
कोराअनुसूचित जनजाति (ST)भाषा और परंपराओं का संरक्षण
डोमअनुसूचित जाति (SC)शिक्षा और रोजगार के अवसर बढ़ाना
कुम्भकारअन्य पिछड़ा वर्ग (OBC)आर्थिक और सामाजिक विकास
सदगोपअन्य पिछड़ा वर्ग (OBC)पारंपरिक अधिकारों और संस्कृति का संरक्षण

मुख्यमंत्री ने कहा कि ये समुदाय पश्चिम बंगाल की सामाजिक और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। राज्य सरकार इन समुदायों की पहचान और परंपराओं को सुरक्षित रखने के साथ-साथ उनके विकास के लिए ठोस कदम उठा रही है।

भाषा, संस्कृति और विकास पर रहेगा फोकस

ममता बनर्जी के अनुसार नए बोर्ड समुदायों की भाषाओं, सांस्कृतिक परंपराओं और पारंपरिक अधिकारों की रक्षा करने के साथ-साथ उनके लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के बेहतर अवसर सुनिश्चित करने की दिशा में काम करेंगे।

  • समुदायों की भाषा और संस्कृति का संरक्षण
  • शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार
  • रोजगार और आर्थिक अवसरों का विस्तार

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य इन समुदायों को मुख्यधारा से जोड़ना और उनके सामाजिक-आर्थिक स्तर को मजबूत बनाना है।

2013 से चल रही है बोर्ड गठन की पहल

ममता बनर्जी ने बताया कि वर्ष 2013 से राज्य सरकार कमजोर और पिछड़े समुदायों के सर्वांगीण विकास के लिए कई सांस्कृतिक और विकास बोर्ड गठित कर चुकी है। इन बोर्डों के माध्यम से विभिन्न समुदायों की पहचान को संरक्षित करने और उनके विकास को गति देने का प्रयास किया जा रहा है।

सरकार का मानना है कि इस तरह की संस्थागत पहल से समाज के विभिन्न वर्गों को समान अवसर मिलेंगे और सामाजिक समावेशन को बढ़ावा मिलेगा।

‘मां, माटी, मानुष’ की नीति पर जोर

मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि उनकी सरकार की ‘मां, माटी, मानुष’ की नीति का अर्थ है कि राज्य में किसी भी समुदाय को पीछे नहीं छोड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि समावेशी विकास के जरिए हर नागरिक तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना ही सरकार का लक्ष्य है।

निष्कर्ष

पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा पांच नए सांस्कृतिक एवं विकास बोर्ड बनाने की घोषणा को राज्य में सामाजिक समावेशन और सांस्कृतिक संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे संबंधित समुदायों की परंपराओं की रक्षा के साथ-साथ उनके सामाजिक और आर्थिक विकास को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।


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