बोधगया: जयश्री बुद्ध विहार में अस्थि कलश दर्शन को उमड़ी देश-विदेश से भीड़

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बोधगया, ब्यूरो | वेब वार्ता

बिहार के विश्वप्रसिद्ध तीर्थस्थल बोधगया स्थित जयश्री बुद्ध विहार में भगवान बुद्ध तथा उनके प्रमुख शिष्यों सारिपुत्र और महामोगलायन के पवित्र अस्थि कलश के दर्शन के लिए देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। श्रद्धालु पूरी श्रद्धा और अनुशासन के साथ पंक्तिबद्ध होकर दर्शन-पूजन कर रहे हैं।

तीन दिवसीय धार्मिक आयोजन, 1 से 3 फरवरी तक

महाबोधि सोसायटी ऑफ इंडिया के महासचिव भंते शिवली थेरो ने बताया कि यह तीन दिवसीय विशेष धार्मिक कार्यक्रम 1 फरवरी से 3 फरवरी तक आयोजित किया गया है। कार्यक्रम की शुरुआत महाबोधि सोसायटी के प्रतिनिधियों द्वारा पारंपरिक वाद्य यंत्रों और विशेष परिधानों के साथ अस्थि कलशों को महाबोधि मंदिर के गर्भगृह में ले जाकर विधिवत पूजा-अर्चना से हुई।

भक्ति गीतों और नृत्य के साथ दी जा रही श्रद्धांजलि

पूजा-अर्चना के दौरान श्रद्धालु भक्ति गीतों, बौद्ध मंत्रों और पारंपरिक नृत्य के माध्यम से भगवान बुद्ध और उनके शिष्यों को श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। इसके बाद अस्थि कलशों को जयश्री बुद्ध विहार परिसर में आम श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ रखा गया, जहां श्रद्धालु श्रद्धा पूर्वक दर्शन और पूजन कर रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय सहभागिता, कई देशों से पहुंचे श्रद्धालु

इस आयोजन में भारत के अलावा श्रीलंका, कोरिया, थाईलैंड, जापान, वियतनाम, भूटान सहित विश्व के कई देशों से बौद्ध श्रद्धालु पहुंचे हैं। कार्यक्रम का समापन 3 फरवरी को निकाली जाने वाली भव्य शोभा यात्रा के साथ होगा, जिसमें बड़ी संख्या में अंतरराष्ट्रीय श्रद्धालु सहभागिता करेंगे।

भव्य सजावट से सजा जयश्री बुद्ध विहार परिसर

आयोजन के अवसर पर जयश्री बुद्ध विहार और महाबोधि सोसायटी परिसर को फूल-मालाओं, रोशनी और आकर्षक सजावट से भव्य रूप दिया गया है। शांत, आध्यात्मिक और भक्तिमय वातावरण में श्रद्धालु गहरी आस्था के साथ इस दुर्लभ दर्शन का लाभ उठा रहे हैं।

  • भगवान बुद्ध, सारिपुत्र और महामोगलायन के अस्थि कलश का दर्शन
  • 1 से 3 फरवरी तक तीन दिवसीय आयोजन
  • महाबोधि सोसायटी ऑफ इंडिया द्वारा आयोजन
  • कई देशों के श्रद्धालुओं की अंतरराष्ट्रीय सहभागिता
  • 3 फरवरी को भव्य शोभा यात्रा के साथ समापन

उल्लेखनीय है कि महाबोधि सोसायटी ऑफ इंडिया द्वारा यह आयोजन प्रतिवर्ष किया जाता है, जो बोधगया को वैश्विक बौद्ध श्रद्धा और शांति का केंद्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

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