ट्रंप के Gaza Peace Board में पाकिस्तान शामिल, भारत ने ठुकराया – शहबाज शरीफ के बयान पर घरेलू विरोध की आग

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इस्लामाबाद, अंतरराष्ट्रीय डेस्क | वेब वार्ता 

Gaza Peace Board: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ इन दिनों देश के अंदर और सोशल मीडिया पर जबरदस्त आलोचना का सामना कर रहे हैं। वजह है — उनका हालिया फैसला जिसमें उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नए “गाजा पीस बोर्ड” (Gaza Peace Board) का समर्थन किया है। यह वही शहबाज शरीफ हैं जिन्होंने 2020 में ट्रंप के मध्य पूर्व शांति प्रस्ताव को “अन्यायपूर्ण और दमनकारी” बताया था।

दावोस में ट्रंप ने लॉन्च किया “बोर्ड ऑफ पीस” चार्टर

22 जनवरी 2026 को स्विट्जरलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने ‘बोर्ड ऑफ पीस’ नामक एक नया अंतरराष्ट्रीय चार्टर लॉन्च किया। इसका उद्देश्य गाजा में युद्ध रोकना, सीजफायर लागू करना, मानवीय सहायता पहुंचाना और पुनर्निर्माण में सहयोग देना है। ट्रंप ने कहा कि “गाजा का युद्ध अब सचमुच खत्म हो रहा है, और अब समय है शांति का।”

इस बोर्ड में पाकिस्तान, UAE, हंगरी, कोसोवो और पराग्वे जैसे देश शामिल हुए हैं। हालांकि, भारत ने इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया है।

2020 में विरोध, 2026 में समर्थन — दोहरा रवैया?

2020 में जब ट्रंप ने ‘पीस टू प्रॉस्पेरिटी’ प्लान पेश किया था, तब शहबाज शरीफ (तब विपक्ष के नेता) ने उसे कठोर शब्दों में नकार दिया था। उन्होंने X (पूर्व ट्विटर) पर लिखा था —
“ट्रंप का मिडिल ईस्ट पीस प्लान इजरायल को यरुशलम की कब्जे और फिलिस्तीन की जमीन पर अवैध बस्तियों की वैधता देता है। यह एक अन्यायपूर्ण, पक्षपाती और दमनकारी योजना है।”

अब वही शहबाज शरीफ 2026 में ट्रंप के “पीस बोर्ड” को समर्थन देते हुए कहते हैं —
“मैं राष्ट्रपति ट्रंप के 20-पॉइंट प्लान का स्वागत करता हूं, जो गाजा में युद्ध खत्म करेगा और फिलिस्तीनियों को अधिक मानवीय सहायता देगा।”

उनके इस बयान को लेकर पाकिस्तान में उन्हें ‘U-turn शरीफ’ कहा जा रहा है और सोशल मीडिया पर उनकी जमकर खिल्ली उड़ाई जा रही है।

PTI का तीखा विरोध — “फिलिस्तीनी हितों के खिलाफ फैसला”

मुख्य विपक्षी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने इसे सरकार का ‘शर्मनाक कदम’ बताया है। पीटीआई प्रवक्ता ने कहा —
“PTI पाकिस्तान सरकार के बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने के फैसले को पूरी तरह नकारती है। यह कदम UN सिस्टम को कमजोर करेगा और फिलिस्तीनी हितों को नुकसान पहुंचाएगा।” पीटीआई ने यह भी मांग की है कि सरकार इस निर्णय पर संसद में चर्चा करे और सभी पक्षों को शामिल करे।

पाकिस्तानी बुद्धिजीवियों ने जताई नाराज़गी

वरिष्ठ पत्रकार जाहिद हुसैन ने शहबाज के इस कदम को “पाकिस्तान के लिए सबसे विनाशकारी निर्णय” बताया। उन्होंने ट्वीट किया —
“क्या पाकिस्तान अब ट्रंप की अच्छी किताबों में रहना चाहता है? यह नैतिक रूप से गलत और बचाव योग्य नहीं।”

लेखिका फातिमा भुट्टो ने तंज कसते हुए लिखा —
“तो पाकिस्तान अब इजरायल के साथ पीस बोर्ड में बैठेगा? वही लोग जो फिलिस्तीन के नरसंहार के ज़िम्मेदार हैं? क्या शर्म की बात है।”

कार्यकर्ता अम्मार अली जान ने इसे “शर्मनाक विश्वासघात” बताया और कहा कि यह फैसला बिना किसी मीडिया या संसदीय चर्चा के लिया गया है। उन्होंने कहा कि यह “फिलिस्तीन की कब्जे को जारी रखने वाला नियोकोलोनियल इंतजाम” है।

पाकिस्तान की साख पर सवाल

कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से पाकिस्तान की “फिलिस्तीन समर्थक” विदेश नीति कमजोर पड़ेगी। 2020 में जुल्म कहने वाले शहबाज शरीफ अब 2026 में ‘ओके’ कह रहे हैं, जिससे उनकी राजनीतिक विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

फिलहाल, पाकिस्तान सरकार की ओर से इस विरोध पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन सोशल मीडिया पर #ShahbazUturn और #PeaceBoardPakistan जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं।

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