उत्तर प्रदेश: वाराणसी और बलिया में फिर से कहर बनकर टूटी गंगा, बाढ़ से हजारों लोग प्रभावित

वाराणसी/बलिया (उप्र), (वेब वार्ता)। उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही बारिश और गंगा-वरुणा नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी से वाराणसी और बलिया जिले में बाढ़ की स्थिति गंभीर होती जा रही है। नदियों का पानी अब शहर और गांवों की गलियों में घुसने लगा है। वाराणसी के घाट पूरी तरह से जलमग्न हो गए हैं, जबकि बलिया में गंगा और सरयू नदी ने तबाही मचानी शुरू कर दी है।

वाराणसी: घाट डूबे, गंगा आरती प्रभावित

केंद्रीय जल आयोग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, वाराणसी में गंगा का जलस्तर चेतावनी चिह्न 70.262 मीटर को पार कर 71.00 मीटर तक पहुंच गया है। खतरे का निशान 71.262 मीटर है। गंगा और वरुणा दोनों नदियों के उफान से शहर के निचले इलाके जलमग्न हो गए हैं।

  • मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट पूरी तरह डूब गए हैं।

  • शवदाह क्रिया अब गलियों और छतों पर की जा रही है।

  • विश्व प्रसिद्ध दशाश्वमेध घाट की गंगा आरती अब छतों पर सांकेतिक रूप से आयोजित की जा रही है।

  • रमना, सामने घाट, नगवा, कोनिया और हुकुलगंज जैसे इलाकों में घरों के अंदर पानी भर चुका है

स्थानीय निवासी रामजी प्रसाद ने कहा –

“हमारे घर की निचली मंजिल पूरी तरह डूब चुकी है। अब दूसरी मंजिल पर परिवार के साथ रह रहे हैं। राशन और पीने के पानी की भारी दिक्कत हो रही है।”

बलिया: गंगा और सरयू का प्रकोप

बलिया जिले में गंगा और सरयू नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने के कारण हालात भयावह हो गए हैं।

  • गंगा का जलस्तर खतरे के निशान 57.615 मीटर से करीब दो मीटर ऊपर 59.64 मीटर तक दर्ज किया गया।

  • सरयू नदी भी 80 सेंटीमीटर खतरे के निशान से ऊपर बह रही है।

  • महावीर घाट और अन्य घाट जलमग्न हो चुके हैं।

  • शवों का अंतिम संस्कार अब सड़कों और ऊंचे स्थानों पर किया जा रहा है।

बलिया के जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह ने बताया कि प्रशासन लगातार राहत कार्यों में जुटा है।

  • प्रभावित क्षेत्रों में 33 नौकाएं तैनात की गई हैं।

  • बाढ़ प्रभावित गांवों में एनडीआरएफ और पीएसी की टीमें काम कर रही हैं।

  • प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और राहत सामग्री वितरित करने का काम चल रहा है।

फसलों और ग्रामीण जीवन पर असर

बाढ़ का असर केवल शहर तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण इलाकों में भी इसकी मार साफ दिख रही है।

  • खेतों में लगी धान और सब्ज़ियों की फसलें पूरी तरह जलमग्न हो गई हैं।

  • कई किसानों के घर और पशुशालाएं पानी में डूब गई हैं।

  • हजारों लोग बेघर होकर सुरक्षित स्थलों पर शरण लेने को मजबूर हैं।

  • पानी में डूबे क्षेत्रों में सांप-बिच्छू और मच्छरों का खतरा बढ़ गया है।

  • बच्चों और बुजुर्गों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां होने लगी हैं।

प्रशासन की चुनौतियां

हालांकि प्रशासन ने राहत सामग्री, दवाइयां और नावें तैनात कर दी हैं, लेकिन बढ़ते पानी ने चुनौतियां और कठिन बना दी हैं।

  • निचले इलाकों में पीने के पानी और भोजन की भारी कमी है।

  • कई स्कूल बंद करने पड़े हैं, जबकि बच्चे बाढ़ग्रस्त इलाकों में पढ़ाई से वंचित हो रहे हैं।

  • स्वास्थ्य विभाग की टीम लगातार बाढ़ प्रभावित गांवों में कैंप लगाकर टीकाकरण और दवाइयों का वितरण कर रही है।

निष्कर्ष

वाराणसी और बलिया में गंगा और वरुणा का बढ़ता जलस्तर लोगों की मुश्किलें लगातार बढ़ा रहा है। घाटों का जलमग्न होना न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों को प्रभावित कर रहा है, बल्कि लोगों के जीवन और जीविका पर भी सीधा असर डाल रहा है। प्रशासन राहत और बचाव कार्य में जुटा है, लेकिन बाढ़ से प्रभावित परिवारों की पीड़ा कम होने का नाम नहीं ले रही।

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