दिल्ली पुलिस ने 6 साल की बच्ची के बलात्कारी-हत्यारे को 4 साल की फरारी के बाद बिहार से गिरफ्तार किया

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नई दिल्ली, (वेब वार्ता)। दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा (क्राइम ब्रांच) की डकैती-रोधी एवं विशिष्ट अपराध (एआरएससी) इकाई ने एक जघन्य अपराध को अंजाम देने वाले दोषी को चार साल से अधिक समय की फरारी के बाद बिहार से गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी, 40 वर्षीय संजय उर्फ सुजॉय, को पटना से तीन महीने के चुनौतीपूर्ण अभियान के बाद पकड़ा गया। संजय को 2007 में दिल्ली के कापसहेड़ा इलाके में महज छह साल की बच्ची के साथ बलात्कार और हत्या का दोषी ठहराया गया था।

मासूम को समोसे का लालच देकर ले गया था साथ

अभियोजन पक्ष के अनुसार, 25 अक्टूबर 2007 की शाम पीड़िता अपने भाई और अन्य बच्चों के साथ घर के पास खेल रही थी। आरोपी संजय, जो उसका पड़ोसी था, ने उसे समोसा खिलाने का लालच दिया और एक सुनसान खाली प्लॉट पर ले गया।
वहां उसने बच्ची के साथ जघन्य बलात्कार किया और अपराध छुपाने के लिए उसकी हत्या कर दी
अगले दिन 26 अक्टूबर 2007 को शव बरामद हुआ और थाना कापसहेड़ा में FIR नंबर 275/07 दर्ज की गई।

आजीवन कारावास के बाद मिली पैरोल, फिर हो गया फरार

इस मामले में द्वारका अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने 25 नवंबर 2010 को संजय को आजीवन कारावास और ₹10,000 जुर्माने की सजा सुनाई।
7 फरवरी 2014 को दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस सजा को बरकरार रखा।
15 जून 2021 को उसे पैरोल दी गई, लेकिन आत्मसमर्पण करने के बजाय वह फरार हो गया।

गुप्त सूचना पर पटना से गिरफ्तारी, नाम बदलकर छुपा था

एआरएससी की टीम, एसीपी पंकज अरोड़ा की निगरानी में काम कर रही थी।
इंस्पेक्टर मंगेश त्यागी और इंस्पेक्टर रॉबिन त्यागी की टीम को गुप्त सूचना मिली कि संजय अब ‘सुजॉय’ नाम से पटना में छुपा है।
तकनीकी निगरानी और मानव खुफिया के आधार पर तीन महीने की मेहनत के बाद, पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया।
इस अभियान में दिल्ली पुलिस के 10 से अधिक कर्मियों ने हिस्सा लिया।

डीसीपी संजीव कुमार यादव ने कहा:
“कानून से बचने के लिए आरोपी ने अपना नाम बदल लिया था और बिहार के विभिन्न इलाकों में छुपता रहा।”

फरारी के दौरान भी जारी रखा अपराध

पूछताछ में सामने आया कि फरारी के दौरान भी संजय ने आपराधिक गतिविधियाँ जारी रखीं।
पैरोल के दौरान उसने पटना के दरियापुर इलाके में महिलाओं से छेड़छाड़ की और उनकी मर्यादा भंग करने का प्रयास किया। इस मामले में FIR नंबर 230/21 दीदारगंज थाने में दर्ज है।
फरारी के दौरान उसने दो बार शादी की। पहली पत्नी से उसका एक बच्चा है और दूसरी पत्नी गर्भवती है।

इस गिरफ्तारी ने न्याय की लंबित प्रक्रिया को आगे बढ़ाया है और एक खतरनाक अपराधी को वापस जेल में डाल दिया गया है।

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