‘ताना-बाना’ टेक्सटाइल प्रदर्शनी में उभरी टेक्सटाइल कला की रचनात्मक उड़ान, विद्यार्थियों की कृतियों ने मोहा मन

लखनऊ, हेमंत शुक्ला | वेब वार्ता

राजधानी लखनऊ में आर्ट एंड क्राफ्ट कॉलेज के टेक्सटाइल डिज़ाइन विभाग के विद्यार्थियों की रचनात्मक प्रतिभा उस समय पूरी भव्यता के साथ सामने आई, जब अलीगंज स्थित कला स्त्रोत गैलरी में ‘ताना-बाना’ टेक्सटाइल प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। इस प्रदर्शनी में छात्रों द्वारा परिधान, वस्त्र सज्जा और कपड़ा कला की पारंपरिक व आधुनिक शैलियों का सृजनात्मक संगम प्रस्तुत किया गया, जिसे कला प्रेमियों और विशेषज्ञों से भरपूर सराहना मिली।

Tana Bana Textile Exhibition Lucknow2

प्रदर्शनी न केवल विद्यार्थियों की तकनीकी दक्षता को दर्शाती है, बल्कि यह भी प्रमाणित करती है कि लखनऊ की पारंपरिक शिल्प परंपरा आज भी नई सोच और आधुनिक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ रही है। ‘ताना-बाना’ के माध्यम से विद्यार्थियों ने यह दिखाया कि कपड़ा केवल पहनावे का माध्यम नहीं, बल्कि भाव, विचार और संस्कृति की अभिव्यक्ति भी है।

परंपरा और प्रयोग का सशक्त संगमTana Bana Textile Exhibition Lucknow1

दुनिया भर में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुके लखनऊ आर्ट एंड क्राफ्ट कॉलेज के होम आर्ट्स एंड होम क्राफ्ट विभाग के अंतर्गत संचालित टेक्सटाइल डिज़ाइन पाठ्यक्रम के विद्यार्थियों ने इस प्रदर्शनी में बाटिक, चिकनकारी, टेपेस्ट्री, टाइ-डाइ, कांथा और पॉप आर्ट जैसी विविध विधाओं में किए गए प्रयोग प्रस्तुत किए।

प्रदर्शनी का उद्घाटन प्रसिद्ध फैशन डिज़ाइनर, परिधान उद्योग से जुड़े व्यवसायी एवं कॉलेज के प्राचार्य रतन कुमार तथा वरिष्ठ प्रोफेसर आलोक कुमार ने किया। दोनों ने विद्यार्थियों की रचनात्मकता की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे मंच छात्रों को व्यावसायिक और कलात्मक दोनों स्तरों पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।

अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों की कृतियाँ रहीं आकर्षण का केंद्र

विद्यार्थी का नामकृति / विषयप्रयुक्त शैली
गगनदीप शर्मा‘वीवेन स्टोरीज़’, ‘अभिमन्यु’बाटिक
इशिता सोनकर‘मदर एंड चाइल्ड’, बाटिक ड्रेसबाटिक
ऋचा सिंह‘सी-स्केप’टेक्सटाइल आर्ट
मेहक गुप्तापॉप सिंगर्स पोस्टर, ‘ब्लाइंड’पॉप आर्ट, बाटिक
राधा त्रिपाठीत्रिदेव चित्रांकनटेक्सटाइल पेंटिंग

गगनदीप शर्मा की बाटिक कृतियाँ ‘वीवेन स्टोरीज़’ और ‘अभिमन्यु’ विशेष रूप से चर्चित रहीं। ‘वीवेन स्टोरीज़’ में गाय के ऊपर लेटी स्त्री के माध्यम से मातृत्व और करुणा के भावों को उकेरा गया है, जबकि ‘अभिमन्यु’ युद्ध, वेग और पीड़ा का प्रतीकात्मक चित्रण प्रस्तुत करता है।

इशिता सोनकर की ‘मदर एंड चाइल्ड’ कृति मैरून धरातल पर क्रीम रंगों में रची गई है, जिसमें प्रकाश और छाया का संतुलन भावनात्मक गहराई उत्पन्न करता है। उनकी डिज़ाइन की गई बाटिक ड्रेस को रंग संयोजन और टेक्सचर के लिए विशेष सराहना मिली।

तृतीय वर्ष के विद्यार्थियों की रचनात्मक भागीदारी

प्रदर्शनी में तृतीय वर्ष की छात्राओं शेफाली चन्द्रा, खुशी वर्मा, सौम्या रावत, तफशीना परवीन, आशिता वर्मा और अलंकृता शुक्ला ने भी अपनी रचनात्मक प्रस्तुतियों से प्रदर्शनी को समृद्ध किया।

खुशी वर्मा का जॉर्जेट क्लॉथ पर ग्रीन चिकनकारी सूट, ‘शाम-ए-अवध’ शीर्षक टेपेस्ट्री और राधा-कृष्ण कांथा चित्र दर्शकों को खासा पसंद आया। अलंकृता शुक्ला ने फाइन चिकनकारी कुर्ता, हाथी आकृति वाले कुशन कवर और विराट कोहली का बाटिक पोर्ट्रेट प्रस्तुत किया।

शिक्षा, शिल्प और भविष्य की दिशा

प्रदर्शनी यह संदेश देती है कि टेक्सटाइल डिज़ाइन केवल फैशन तक सीमित नहीं, बल्कि यह संस्कृति, इतिहास और आधुनिक सोच का जीवंत माध्यम है। छात्रों ने पारंपरिक शिल्प को आधुनिक संदर्भों से जोड़ते हुए भविष्य के लिए नई संभावनाओं का संकेत दिया।

निष्कर्ष

‘ताना-बाना’ प्रदर्शनी ने यह सिद्ध किया कि लखनऊ की शिल्प परंपरा आज भी जीवंत है और नई पीढ़ी के हाथों में सुरक्षित व सृजनात्मक रूप से विकसित हो रही है। यह मंच विद्यार्थियों के लिए आत्मविश्वास, पहचान और व्यावसायिक संभावनाओं का सशक्त माध्यम बनकर उभरा है।

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