अखिलेश यादव के ‘दुर्गंध’ वाले बयान पर भड़के मुख्तार अब्बास नकवी, कहा- ‘उनकी हताशा बोल रही है’

नई दिल्ली, (वेब वार्ता)। सपा प्रमुख अखिलेश यादव के ‘भाजपा गौशाला से दुर्गंध फैलाती है, हम इत्र से सुगंध फैलाते हैं’ वाले बयान पर सियासत तेज हो गई है। भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने अखिलेश यादव के बयान पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि अखिलेश के बयान में उनकी हताशा बोल रही है।

भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा, “मुझे अफसोस होता है कि कुछ लोग खुद को गौवंशी कहते हैं। इसके बावजूद वह कभी गौहत्या करने वालों के समर्थन में उतरते दिखाई देते हैं, तो कभी उन्हें गौशालाओं से दुर्गंध आने लगती है। मुझे लगता है कि यह उनकी हताशा बोल रही है। साथ ही यह भी सवाल खड़े करता है कि वह किस रास्ते पर जाना चाहते हैं।”

भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा, “वक्फ अधिनियम में व्यापक संवैधानिक सुधारों को सांप्रदायिक ब्लैकमेलिंग का शिकार बनाया जा रहा है, जो न तो वक्फ के लिए अच्छा है, न ही राष्ट्र के लिए और न ही किसी धर्म के लिए अच्छा है। अगर वह वक्फ अधिनियम में संवैधानिक सुधारों पर सांप्रदायिक हमला करते हैं और फिर सांप्रदायिक ब्लैकमेलिंग का सहारा लेते हैं। साथ ही वक्फ अधिनियम को यह दिखाते हैं कि वह एक पवित्र ग्रंथ है, जिसे छुआ नहीं जा सकता। मगर किसी को यह समझना चाहिए कि यह संसद द्वारा पारित अधिनियम है और कोई भी सुधार संसद के माध्यम से ही किया जाएगा। इस बारे में कोई भ्रम नहीं होना चाहिए। वक्फ के सिस्टम में भय और भ्रम का भौकाल खड़ा करने की कोशिश की गई है।”

उन्होंने आगे कहा, “मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि जो भी धार्मिक स्थल हैं, चाहे वह मस्जिद हो या दरगाह या फिर ईदगाहें, वह पूरी तरह से सुरक्षित हैं। मैं इतना ही कहूंगा कि सांप्रदायिक ब्लैकमेलिंग के चक्रव्यूह में किसी को फंसने की जरूरत नहीं है।”

नवरात्रि के दौरान मीट की दुकानें बंद रखने और सड़कों पर नमाज नहीं पढ़ने की भाजपा विधायकों की मांग पर मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा, “सभी को धार्मिक भावनाओं का सम्मान करना चाहिए। हमारा देश सभी धर्मों के अनुयायियों का घर है, जहां विभिन्न त्योहार मनाए जाते हैं और सभी समुदायों के लोग एक-दूसरे की परंपराओं का सम्मान करते हैं। यह सभी जानते हैं कि नवरात्रि के दौरान लोग व्रत रखते हैं और पवित्रता बनाए रखते हैं। इसका सभी को सम्मान करना चाहिए।”

समाजवादी पार्टी के सांसद रामजी लाल सुमन के आवास पर हुए हमले पर नकवी ने कहा, “रामजी लाल सुमन बहुत वरिष्ठ नेता हैं और उनके शब्दों की गलत व्याख्या की गई, जिसके कारण दुर्भाग्यपूर्ण परिणाम सामने आए। अब जबकि उन्होंने माफी मांग ली है, तो मेरा मानना है कि हम यही कह सकते हैं कि ‘देर से आए, लेकिन दुरुस्त आएं’।”

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