लखनऊ, धर्म डेस्क | वेब वार्ता
मकर संक्रांति के पावन अवसर पर इस्कॉन (इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शसनेस) लखनऊ द्वारा एक विशाल सेवा अभियान का आयोजन किया गया, जिसमें 1.25 लाख से अधिक श्रद्धालुओं को खिचड़ी प्रसाद वितरित किया गया। यह सेवा कार्यक्रम इस्कॉन लखनऊ के मंदिर अध्यक्ष श्रीमान अपरिमेय श्याम प्रभु जी के दिशा-निर्देशन में संपन्न हुआ। पूरे आयोजन के दौरान भक्ति, सेवा और सामाजिक समरसता का अद्भुत संगम देखने को मिला।
लखनऊ के कई क्षेत्रों में हुआ खिचड़ी प्रसाद वितरण
मकर संक्रांति के दिन इस्कॉन भक्त वृंद ने लखनऊ के विभिन्न प्रमुख क्षेत्रों में श्रद्धालुओं और आम नागरिकों को खिचड़ी प्रसाद वितरित किया। सुबह से ही अलग-अलग स्थानों पर सेवा शिविर लगाए गए, जहां बड़ी संख्या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।
- इस्कॉन मंदिर, सुशांत गोल्फ सिटी
- चारबाग और ऐशबाग क्षेत्र
- गोल मार्केट, एसजीपीजीआई और अर्जुनगंज
- सिंगार नगर, पत्रकारपुरम और सीतापुर रोड मंडी
- कृष्णा नगर और साउथ सिटी, रायबरेली रोड
हरिनाम संकीर्तन और भक्ति वातावरण
खिचड़ी प्रसाद वितरण के दौरान केवल भोजन सेवा ही नहीं, बल्कि भक्ति और आध्यात्मिक आनंद का भी वातावरण बना रहा। इस्कॉन भक्त वृंद द्वारा हरिनाम संकीर्तन किया गया, जिसमें श्रद्धालु भजनों पर झूमते और नृत्य करते नजर आए। भक्तों के साथ-साथ स्थानीय नागरिकों ने भी इस आध्यात्मिक माहौल का आनंद लिया।
सेवा के साथ सामाजिक सहभागिता
इस सेवा अभियान में इस्कॉन भक्तों के साथ बड़ी संख्या में लखनऊवासी भी जुड़े। श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण करते हुए मकर संक्रांति के धार्मिक महत्व को आत्मसात किया। आयोजन का उद्देश्य न केवल अन्नदान था, बल्कि समाज में भक्ति, सेवा और सहयोग की भावना को मजबूत करना भी रहा।
इस्कॉन मीडिया समूह ने जताया आभार
इस्कॉन मीडिया समूह की ओर से बताया गया कि यह कार्यक्रम पूरी तरह सेवा और समर्पण की भावना से किया गया। आयोजन की सफलता में सभी भक्तों, स्वयंसेवकों और सहयोगियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। मीडिया समूह ने कार्यक्रम में सहयोग देने वाले सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।
निष्कर्ष: सेवा और भक्ति का जीवंत उदाहरण
मकर संक्रांति के अवसर पर इस्कॉन लखनऊ द्वारा आयोजित खिचड़ी प्रसाद वितरण कार्यक्रम ने यह साबित किया कि धार्मिक पर्व केवल आस्था तक सीमित नहीं होते, बल्कि समाज सेवा और मानव कल्याण का भी माध्यम बनते हैं। 1.25 लाख से अधिक श्रद्धालुओं तक प्रसाद पहुंचाकर इस्कॉन ने सेवा और भक्ति का एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया।




