हरदोई, लक्ष्मीकान्त पाठक | वेब वार्ता
हरदोई जिले में भीषण ठंड और कोहरे ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। जिलाधिकारी अनुनय झा ने 20 दिसंबर 2025 को सवायजपुर तहसील में सम्पूर्ण समाधान दिवस के दौरान सभी खंड विकास अधिकारियों (BDO) को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि जनपद की प्रत्येक ग्राम पंचायत में अलाव की समुचित व्यवस्था कराई जाए, ताकि ग्रामीणों को ठंड से राहत मिल सके। लेकिन जमीनी हकीकत इससे कोसों दूर है। अधिकांश गांवों में न अलाव जलते दिख रहे हैं, न कोई अन्य राहत व्यवस्था की गई है। गरीब ग्रामीण परिवार ठंड में ठिठुरने को मजबूर हैं।
हरदोई एक कृषि प्रधान जिला है, जहां आबादी का बड़ा हिस्सा (लगभग 70%) ग्रामीण क्षेत्रों में रहता है। 2011 जनगणना के अनुसार कुल आबादी 40.92 लाख थी, जिसमें 35.50 लाख ग्रामीण। 2024 मतदाता सूची के आधार पर अनुमानित आबादी 49.44 लाख है, जिसमें भी 2/3 से अधिक ग्रामीण हैं। जिले में 1306 ग्राम पंचायतें हैं, लेकिन ठंड से निपटने की तैयारी नगण्य है। शहरों में अलाव और रैन बसेरा की व्यवस्था है, लेकिन गांवों में कुछ नहीं।
ग्रामीणों की बदहाली: खेती का संकट और ईंधन की कमी
ग्रामीणों का मुख्य व्यवसाय खेती-बाड़ी है, लेकिन बाढ़, सूखा, बढ़ती लागत (खाद, बीज, कीटनाशक), और उचित मूल्य न मिलने से आर्थिक स्थिति कमजोर हो गई है। गर्म कपड़े या ईंधन जुटाना बड़ी चुनौती बन गया है। शहरीकरण और पूंजीवादी व्यवस्था ने पेड़-पौधों की अंधाधुंध कटाई कर ईंधन की कमी पैदा की है। पहले उपले और लकड़ी से अलाव जलता था, अब वह दुर्लभ हो गया।
ग्रामीण कहते हैं, “सरकार शहरों पर फोकस करती है, गांव भगवान भरोसे हैं।”
DM के निर्देशों की अनदेखी: जिम्मेदारी किसकी?
DM झा ने BDO को अलाव व्यवस्था के निर्देश दिए थे, लेकिन जमीनी स्तर पर अमल नहीं हुआ। कई गांवों में अलाव की कोई व्यवस्था नहीं। प्रशासन की यह लापरवाही गरीबों को ठंड में ठिठुरने को मजबूर कर रही है।
जिले के आंकड़े: ग्रामीण आबादी की उपेक्षा
| विवरण | आंकड़े |
|---|---|
| कुल क्षेत्र | 5986 वर्ग किमी |
| ग्राम पंचायतें | 1306 |
| विकास खंड | 19 |
| 2011 ग्रामीण आबादी | 35.50 लाख |
| अनुमानित 2025 आबादी | 49.44 लाख (70% ग्रामीण) |
यह उपेक्षा ग्रामीण विकास योजनाओं पर सवाल खड़े करती है।
मांग: तत्काल अलाव और राहत व्यवस्था
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि हर ग्राम पंचायत में अलाव, कंबल वितरण, और रैन बसेरा जैसी व्यवस्था की जाए। ठंड से मौतों का खतरा बढ़ रहा है।
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