Tuesday, January 27, 2026
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बालिका दिवस पर हरदोई में विधिक जागरूकता शिविर, छात्राओं को बताए गए अधिकार और कानून

हरदोई, लक्ष्मीकान्त पाठक | वेब वार्ता

राष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर हरदोई में बालिकाओं के अधिकारों और महिला सुरक्षा से जुड़े कानूनों को लेकर एक विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में छात्राओं को पीसीपीएनडीटी एक्ट, पॉश एक्ट, बाल विवाह निषेध अधिनियम सहित विभिन्न कानूनी प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी गई।

राजकीय बालिका इंटर कॉलेज में हुआ आयोजन

यह शिविर 24 जनवरी 2026 को राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली एवं उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देशानुसार आयोजित किया गया। कार्यक्रम जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, हरदोई की अध्यक्ष एवं जनपद न्यायाधीश श्रीमती रीता कौशिक के संरक्षण तथा अपर जिला जज/सचिव भूपेंद्र प्रताप के मार्गदर्शन में सम्पन्न हुआ।

तहसील विधिक सेवा समिति सदर के सचिव/तहसीलदार सचिंद्र कुमार शुक्ला के निर्देशन में राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, हरदोई में इस विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया।

बालिकाओं के अधिकारों पर विस्तार से जानकारी

शिविर में बालिकाओं को जन्म और शिक्षा का अधिकार, बच्चों के कानूनी अधिकार, बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 तथा कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न से संबंधित पॉश एक्ट 2013 के बारे में विस्तार से बताया गया। इसके साथ ही लिंग चयन की रोकथाम से जुड़े पीसीपीएनडीटी अधिनियम पर भी जागरूक किया गया।

कन्या सुमंगला और आरटीई एक्ट की जानकारी

मुख्यालय से उपस्थित अशोक कुमार एवं तहसील सदर की लीगल एड क्लीनिक से कीर्ति कश्यप ने छात्राओं को उनके कानूनी अधिकारों के साथ-साथ कन्या सुमंगला योजना, 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों के लिए निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा (आरटीई एक्ट) तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए निजी विद्यालयों में निःशुल्क शिक्षा के प्रावधानों की जानकारी दी।

पीसीपीएनडीटी एक्ट: सख्त दंड का प्रावधान

पीसीपीएनडीटी अधिनियम, 1994 के अंतर्गत बताया गया कि गर्भ में पल रहे भ्रूण के लिंग की पहचान करना और उसका खुलासा करना कानूनन अपराध है। इस अधिनियम के उल्लंघन पर पहली बार में 3 वर्ष तक का कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने का प्रावधान है, जबकि पुनरावृत्ति पर 5 वर्ष तक का कारावास, 50 हजार रुपये जुर्माना और चिकित्सकीय लाइसेंस निरस्त किया जा सकता है।

बाल विवाह कानून सभी धर्मों पर लागू

पीएलवी श्यामू सिंह ने बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 की जानकारी देते हुए बताया कि यह कानून 1 नवंबर 2007 से लागू है और सभी धर्मों पर समान रूप से प्रभावी है। 21 वर्ष से कम आयु के पुरुष और 18 वर्ष से कम आयु की महिला का विवाह अपराध की श्रेणी में आता है, जो संज्ञेय एवं गैर-जमानती अपराध है।

पॉश एक्ट और निःशुल्क विधिक सहायता

पॉश एक्ट 2013 के तहत यह बताया गया कि प्रत्येक संस्था में आंतरिक शिकायत समिति का गठन अनिवार्य है। पीड़िता की पहचान पूर्ण रूप से गोपनीय रखी जाती है और दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई होती है। साथ ही जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा संचालित निःशुल्क विधिक सेवाओं एवं नालसा हेल्पलाइन नंबर 15100 के बारे में भी जानकारी दी गई।

  • बालिकाओं को शिक्षा और कानूनी अधिकारों की जानकारी
  • पीसीपीएनडीटी और पॉश एक्ट पर विशेष फोकस
  • बाल विवाह कानून को लेकर जागरूकता
  • निःशुल्क विधिक सहायता सेवाओं की जानकारी

शिविर में प्रधानाचार्य सुषमा दुबे, शिक्षिकाएं प्रत्यूष सिंह, सुषमा पाठक, बड़ी संख्या में छात्राएं एवं विद्यालय स्टाफ उपस्थित रहा। वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा के माध्यम से ही बालिकाएं अपने अधिकारों के प्रति जागरूक बन सकती हैं और किसी भी समस्या की स्थिति में महिला हेल्पलाइन 1090 पर संपर्क कर सकती हैं।

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