नाटक अन्धयुगम् में दिखा महाभारत का अंतिम दृश्य

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लखनऊ, (वेब वार्ता)। जब-जब स्वार्थ बस मर्यादा तोड़ी गई तब-तब महाविनाश हुआ है। नाटक में पौराणिक कथा के माध्यम से आधुनिक भाव बोध को स्थापित किया गया है। नाटक अन्धयुगम् महाभारत युद्ध के अंतिम दिन की घटनाओं पर आधारित है। बुधवार को उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थानम् के सहयोग से संस्था गुलशन वेलफेयर सोसाइटी द्वारा ओजस प्रेक्षागृह, डोमिनेन्स इंटरनेशनल स्कूल, चिनहट, लखनऊ में धर्मवीर भारती की कालजई रचना अंधयुगम् का मंचन संस्कृत में किया गया।

कार्यक्रम का शुभारम्भ संस्था की सचिव डॉ० श्रेया ने मुख्य अतिथि डॉ० राजेश कुमार प्रजापति (आई.ए.एस.) विशेष सचिव, नमामि गंगे एवं जलापूर्ति विभाग, उत्तर प्रदेश शासन एवं शिक्षाविद दिनेश चन्द्र वर्मा के साथ दीप प्रज्वलन करके किया। डॉ० नवलता के द्वारा संस्कृत में अनुवादित एवं जूही कुमारी द्वारा निर्देशित नाटक को कलाकारों ने अपने अभिनय से जीवंत बना दिया।

इसमें दिखाया किस तरह युद्ध से प्राचीरें खंडहर हो चुकी हैं, नगर जल रहा है और कुरुक्षेत्र लाशों और गिद्धों से ढका हुआ है। कौरव सेना के कुछ विचलित योन्द्वा शोक और क्रोध से भरे हुए हैं। वे प्रतिशोध लेने के लिए, कुछ निर्णायक करने के लिए तरस रहे हैं और उस वक़्त भी अश्वत्थामा की निंदा करने से इनकार कर देते हैं।

मंच पर निहारिका कश्यप, जूही कुमारी, कोमल विश्वकर्मा, अलभ्य तिवारी, रूपेश कुमार, डॉ० आनन्द दीक्षित, अर्पित मोदनवाल, प्रिंस सिंह, आर्यन, भानु प्रताप, विदुषी तिवारी, अंशित भद्री, कृष्ण कुमार पाण्डेय, प्रेरणा गौण, आँचल सचदेवा. आशुतोष सिंह. नम्रता आर्या, प्रीति रानी, उज्ज्वल सिंह आदि ने अभिनय किया, वहीं नाटक में प्रकाश परिकल्पना अर्जुन सिंह, पार्श्व संगीत चन्द्रेश पांडेय, मंच संचालन पूजा अग्रवाल व सह निर्देशन निहारिका कश्यप द्वारा किया गया।

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