Saturday, February 28, 2026
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तेलंगाना सुरंग हादसा: श्रमिकों को अपने साथियों की सुरक्षित वापसी की उम्मीद

हैदराबाद, (वेब वार्ता)। तेलंगाना में श्रीशैलम लेफ्ट बैंक कैनाल (एसएलबीसी) परियोजना की सुरंग के अंदर फंसे आठ कर्मियों को बचाने का अभियान जारी है। वहीं, दुर्घटना में बचे श्रमिकों ने अपनी आंखों के सामने हुई खौफनाक घटना का मंजर बयां करते समय अपने साथियों की सुरक्षित वापसी की उम्मीद जताई।

श्रमिकों में से एक निर्मल साहू ने कहा कि जब वे 22 फरवरी की सुबह सुरंग के अंदर गए तो पानी का बहाव काफी बढ़ गया था और ढीली मिट्टी ढहने लगी थी।

झारखंड के रहने वाले साहू ने ‘पीटीआई-वीडियो’ को बताया कि जिन लोगों को खतरा महसूस हुआ वे सुरक्षित बाहर निकल गए, लेकिन आठ लोग बाहर नहीं आ सके।

उन्होंने कहा, ‘‘हमें उम्मीद है कि सरकार हमारे साथियों को सुरक्षित बाहर निकालेगी। हमें उम्मीद है कि वे जीवित होंगे।’’

सुरंग में फंसे मजदूरों में से एक संदीप साहू के रिश्तेदार ओबी साहू ने बताया कि सुरंग से बाहर निकलते समय कुछ मजदूरों को मामूली चोटें आईं।

तेलंगाना के नागरकुरनूल जिले में एसएलबीसी परियोजना में शनिवार को सुरंग का एक हिस्सा ढह जाने के बाद सुरंग के अंदर 48 घंटे से अधिक समय से फंसे आठ लोगों को निकालने के लिए भारतीय सेना, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) और अन्य एजेंसियों के अथक प्रयासों के बावजूद बचाव अभियान में अब तक कोई सफलता नहीं मिली है।

तेलंगाना के आबकारी मंत्री जुपल्ली कृष्ण राव ने सोमवार को कहा कि आठ लोगों के बचने की संभावना ‘‘बहुत कम’’ है, हालांकि उन तक पहुंचने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि 2023 में उत्तराखंड में ‘सिल्कयारा बेंड-बरकोट’ सुरंग में फंसे निर्माण श्रमिकों को बचाने वाले ‘‘रैट माइनर्स’’ (हाथ से पर्वतीय क्षेत्रों की खुदाई करने में महारत रखने वाले व्यक्तियों) की एक टीम लोगों को निकालने के लिए बचाव दल के साथ सहयोग कर रही है।

मंत्री ने कहा कि फंसे हुए लोगों को बचाने में कम से कम तीन से चार दिन लगेंगे, क्योंकि दुर्घटना स्थल कीचड़ और मलबे से भरा हुआ है जिससे बचाव दल के लिए यह एक मुश्किल काम बन गया है।

इस सुरंग में पिछले 48 घंटों से फंसे लोगों की पहचान उत्तर प्रदेश के मनोज कुमार और श्री निवास, जम्मू कश्मीर के सनी सिंह, पंजाब के गुरप्रीत सिंह और झारखंड के संदीप साहू, जेगता जेस, संतोष साहू और अनुज साहू के रूप में हुई है। इन आठ लोगों में से दो इंजीनियर, दो ऑपरेटर और चार मजदूर हैं।

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