केले के रेशे से बन रहे उत्पाद, रोजगार-आय के अवसर बढ़े

ओडीओपी में शामिल है केला

कुशीनगर, ममता तिवारी (वेब वार्ता)। उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में ‘एक जिला-एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना के तहत कुशीनगर में केले को शामिल किया गया है। केले के रेशे से यहां कई तरह के उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। इस पहल से न केवल जिले के किसानों को अतिरिक्त आय का अवसर मिल रहा है, बल्कि कारीगरों को भी रोजगार के अवसर प्राप्त हो रहे हैं। परंपरागत खेती से हटकर अब केले के तने से रेशा निकालकर बैग, चटाई, टोकरी, रस्सी और अन्य उत्पाद भी बनाए जा रहे हैं, जो बाजार में अच्छी कीमत पर बिक रहे हैं।
केला किसान अब सिर्फ फलों से ही नहीं, बल्कि केले के तनों से भी कमाई कर रहे हैं। पहले किसान फसल कटने के बाद तनों को नष्ट कर देते थे। अब इससे अतिरिक्त आय हो रही है। केले के तनों को मशीनों से प्रॉसेस कर महीन धागों में बदला जाता है, जिससे बुनाई कर विभिन्न उत्पाद तैयार किए जाते हैं। इन उत्पादों की मांग देश ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी बढ़ रही है। इस उद्योग से जिले में महिलाओं और युवाओं को रोजगार के नए अवसर भी मिल रहे हैं। कई स्वयं सहायता समूह केले के रेशे से हस्तनिर्मित उत्पाद बनाकर आत्मनिर्भर बन रहे हैं। ओडीओपी योजना के तहत सरकार केले के रेशे से उत्पाद बनाने वाले उद्यमियों को प्रशिक्षण, मशीनें और वित्तीय सहायता भी दे रही है। जिला उद्योग केंद्र के उपायुक्त अभय कुमार सुमन का कहना है कि यह योजना किसानों और कारीगरों के लिए बहुत फायदेमंद साबित हो रही है। केले के रेशे से बने उत्पाद ईको-फ्रेंडली और बायोडिग्रेडेबल होते हैं, इसलिए इनकी मांग तेजी से बढ़ रही है।

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