सोनीपत, रजनीकांत चौधरी (वेब वार्ता)। हरियाणा के गोहाना स्थित बाल भारती विद्यापीठ वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में हरियाणा राज्य बाल कल्याण परिषद के तत्वावधान में बाल सलाह, परामर्श एवं कल्याण केंद्र संख्या-149 के अंतर्गत एक सेमिनार आयोजित किया गया। विषय था “शिक्षकों में लचीलापन, भावनात्मक बुद्धिमत्ता और आत्म-देखभाल को बढ़ाना”। मुख्य वक्ता मंडलीय बाल कल्याण अधिकारी रोहतक एवं राज्य नोडल अधिकारी अनिल मालिक ने शिक्षकों को संबोधित किया और दैनिक चुनौतियों से उबरने के लिए लचीलापन विकसित करने पर जोर दिया।
लचीलापन: दैनिक जीवन की कुंजी
अनिल मालिक ने कहा, “व्यक्तित्व और कार्य प्रणाली में लचीलापन दैनिक बदलावों और चुनौतियों से उबरने में मदद करता है। यह विपरीत परिस्थितियों, तनाव, चिंता, और दबाव का सामना करने की क्षमता विकसित करता है।” उन्होंने शिक्षकों को सलाह दी कि वे अपनी सोच, कार्यशैली, और विद्यार्थी जीवन निर्माण में लचीलापन अपनाएं। आत्म-देखभाल, भावनात्मक विनियमन, और आत्म प्रभावकारिता जैसी रणनीतियां सहायक प्रेरणादायी शैक्षणिक वातावरण बनाती हैं।
मालिक ने अपील की, “शिक्षकों को अपने कौशल पर विश्वास रखना चाहिए, सीखने-सिखाने में प्रयासरत रहना चाहिए, समस्याओं का रचनात्मक समाधान खोजना चाहिए, और विद्यार्थियों को प्रेरित करते रहना चाहिए। तुलना न करें, तिरस्कार न करें, हौसला बढ़ाएं। शिक्षा बाल्टी भरना नहीं, बल्कि सीखने की आग लगाना है। बताने से भूल जाते हैं, सिखाने से याद रहता है, और व्यवहारिक कौशल से हमेशा के लिए सीख जाते हैं।”
परामर्शदाता की सलाह: रचनात्मक तरीके
परामर्शदाता नीरज कुमार ने शिक्षकों को खेल-विधि, कहानियों, और अन्य रचनात्मक तरीकों से पढ़ाने पर प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि ये विधियां विद्यार्थियों में जिज्ञासा और सीखने की प्रवृत्ति बढ़ाती हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता
स्कूल निदेशक हरि प्रकाश गौड़ और प्रिंसिपल सुमन कौशिक ने संयुक्त रूप से कहा, “मनोवैज्ञानिक तरीकों से विभिन्न विषयों पर खुला संवाद सीख के साथ नया अनुभव प्रदान करता है। यह सेमिनार शिक्षकों के लिए उपयोगी रहा।”
सफल आयोजन में योगदान
कार्यक्रम के सफल आयोजन में सहायक कार्यक्रम अधिकारी धर्मपाल, राज्य बाल कल्याण परिषद के आजीवन सदस्य नीरज कुमार, समन्वयक डॉ. स्वाति शर्मा, और विजय चौहान की विशेष भूमिका रही।
निष्कर्ष
गोहाना बाल भारती विद्यालय में यह सेमिनार शिक्षकों को लचीलापन और भावनात्मक बुद्धिमत्ता विकसित करने के लिए प्रेरणादायक साबित हुआ। बाल कल्याण परिषद की यह पहल शिक्षा क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाएगी।




