कांग्रेस नेताओं ने यमुना किनारे बसे गांवों का दौरा किया, फसल नुकसान के लिए मुआवजे की मांग

सोनीपत, राजेश आहूजा (वेब वार्ता)।  हरियाणा के सोनीपत जिले में यमुना नदी के बढ़ते जलस्तर ने किसानों और ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। इस बीच, जिला कांग्रेस कमेटी सोनीपत के अध्यक्ष संजीव दहिया (ग्रामीण) और कमल दीवान (शहरी) ने पूर्व विधायकों सुरेंद्र पंवार, पदम सिंह दहिया और अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ मीमारपुर घाट, महेंदीपुर, बड़ौली, जाजल सहित एक दर्जन से अधिक गांवों का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने ग्रामीणों से यमुना के बढ़ते जलस्तर और इसके कारण हुए नुकसान पर चर्चा की। कांग्रेस नेताओं ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि इस संकट की घड़ी में कांग्रेस पार्टी उनके साथ खड़ी है। साथ ही, उन्होंने सरकार से मांग की कि बाढ़ से प्रभावित किसानों को प्रति एकड़ 1 लाख रुपये मुआवजे के रूप में दिए जाएं।

यमुना का बढ़ता जलस्तर: किसानों की चिंता

पिछले कुछ दिनों से लगातार बारिश और हथिनीकुंड बैराज से छोड़े गए पानी के कारण यमुना नदी का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है। इससे सोनीपत के यमुना किनारे बसे गांवों में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो गई है। खेतों में खड़ी लहलहाती फसलें पानी में डूब गई हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान हुआ है। ग्रामीणों ने बताया कि हर साल बाढ़ के कारण उनकी मेहनत पर पानी फिर जाता है, और इस बार भी स्थिति गंभीर है।

संजीव दहिया ने कहा, “यमुना के बढ़ते जलस्तर ने किसानों को निराश कर दिया है। एक तरफ उनकी फसलें बर्बाद हो रही हैं, तो दूसरी तरफ जनजीवन भी बुरी तरह प्रभावित है। सरकार को तत्काल कदम उठाने चाहिए।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि किसानों की मेहनत को बचाने के लिए ठोस उपायों की जरूरत है।

सरकार पर लापरवाही का आरोप

कमल दीवान ने सरकार पर समय रहते बाढ़ से बचाव के इंतजाम न करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “यदि सरकार ने पहले से बाढ़ संभावित क्षेत्रों में पुख्ता इंतजाम किए होते, तो किसानों की मेहनत बर्बाद न होती।” सुरेंद्र पंवार ने भी सरकार की तैयारियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि हर साल किसानों को बाढ़ के कारण नुकसान झेलना पड़ता है। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को बाढ़ संभावित क्षेत्रों का नियमित दौरा करना चाहिए और दीर्घकालिक समाधान लागू करने चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति से बचा जा सके।

ग्रामीणों ने भी अपनी पीड़ा साझा की। एक किसान ने बताया, “हर साल बाढ़ आती है, और हमारी फसलें बर्बाद हो जाती हैं। सरकार को हमारी मदद के लिए स्थायी समाधान निकालना चाहिए।” ग्रामीणों ने सड़कों, बिजली और संचार व्यवस्था के ठप होने की भी शिकायत की, जिससे उनकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं।

कांग्रेस की मांग: मुआवजा और तत्काल राहत

कांग्रेस नेताओं ने सरकार से मांग की है कि वह तुरंत प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचे और किसानों को हुए नुकसान का आकलन करे। उन्होंने प्रति एकड़ 1 लाख रुपये मुआवजे की मांग की ताकि किसान अपनी आर्थिक हानि से उबर सकें। साथ ही, उन्होंने प्रशासन से अपील की कि बाढ़ संभावित क्षेत्रों में अधिकारी 24 घंटे मुस्तैद रहें ताकि किसी भी अनहोनी को समय रहते रोका जा सके।

संजीव दहिया ने कहा, “हम ग्रामीणों और किसानों के साथ हैं। हमारी मांग है कि सरकार तत्काल राहत कार्य शुरू करे और प्रभावितों को उचित मुआवजा दे।” उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे को विधानसभा और अन्य मंचों पर उठाएगी ताकि प्रभावितों को न्याय मिले।

निरीक्षण में शामिल प्रमुख नेता

दौरे के दौरान जयभगवान दीपालपुर, जयवीर आंतिल, रणजीत कौशिक, सरपंच बिजेंद्र जाजी, सादिक सरपंच, वसीम खान, सलीम, सोनू भारद्वाज, अजीत आंतिल सहित कई अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे। सभी ने ग्रामीणों की समस्याओं को सुना और उनकी मदद के लिए हर संभव प्रयास करने का वादा किया।

आगे की राह

यमुना के बढ़ते जलस्तर ने न केवल सोनीपत, बल्कि हरियाणा के अन्य जिलों जैसे करनाल, पानीपत, और यमुनानगर में भी तबाही मचाई है। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन और अनियोजित जल प्रबंधन इस तरह की आपदाओं को बढ़ावा दे रहे हैं। कांग्रेस नेताओं ने केंद्र और राज्य सरकार से मांग की है कि वे बाढ़ प्रबंधन के लिए दीर्घकालिक नीतियां बनाएं और किसानों को होने वाले नुकसान को कम करने के लिए ठोस कदम उठाएं।

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