ग्वालियर, मुकेश शर्मा | वेब वार्ता
भिंड जिले का औद्योगिक क्षेत्र मालनपुर आज विकास का नहीं बल्कि पर्यावरणीय विनाश का उदाहरण बन गया है। यहां संचालित कई औद्योगिक इकाइयां, विशेष रूप से साई फाइटोसेयूटिकल्स प्राइवेट लिमिटेड, खुलेआम पर्यावरण कानूनों की धज्जियां उड़ाते हुए नालों और नदियों में रासायनिक और चिकित्सीय कचरा बहा रही हैं। इस विषैले अपशिष्ट ने आसपास के इलाकों में जनस्वास्थ्य, पशुधन और खेती पर गंभीर संकट खड़ा कर दिया है।
नदियाँ बनीं मौत की धार
कारखाने से निकलने वाला बिना शोधन का रासायनिक जल नालों के सहारे सीधे नदियों में छोड़ा जा रहा है। इस ज़हरीले पानी ने नदियों को जीवनदायिनी से मौत की धार में बदल दिया है। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, नदियों में मछलियाँ और अन्य जलीय जीव मर रहे हैं, पानी से दुर्गंध उठ रही है और नदी किनारे की उपजाऊ भूमि धीरे-धीरे बंजर हो रही है। यह केवल प्रदूषण नहीं बल्कि प्रकृति के खिलाफ अपराध है।
खुले में फेंका जा रहा चिकित्सीय कचरा
साई फाइटोसेयूटिकल्स प्राइवेट लिमिटेड का रासायनिक और चिकित्सीय कचरा खुले मैदानों और नदियों के किनारे बिखरा पड़ा है। जिस अपशिष्ट के लिए विशेष निस्तारण की आवश्यकता होती है, उसे खुले में फेंका जा रहा है। इस कारण मिट्टी, पानी और हवा लगातार दूषित हो रहे हैं। ग्राम माहो, लहचूरा और आसपास के आधा दर्जन गांवों में पशु इस दूषित पानी को पीकर मर रहे हैं। पशुपालकों ने बताया कि पिछले महीनों में गाय, भैंस और बकरियों की मौतें बढ़ी हैं, दूध उत्पादन घटा है और उनकी आजीविका पर संकट मंडरा रहा है।
- नदियों और नालों में छोड़ा जा रहा है रासायनिक और चिकित्सीय अपशिष्ट।
- दूषित जल से पशुओं की मौत और खेतों की उर्वरता खत्म हो रही है।
- स्थानीय लोगों ने प्रशासन से कार्रवाई की मांग की है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की भूमिका संदिग्ध
मालनपुर की अधिकांश फैक्ट्रियों में अपशिष्ट जल शोधन संयंत्र या तो लगे ही नहीं हैं या केवल कागजों में दर्ज हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की सहायक यंत्री मैडम यादव और सलमान खान की मेहरबानी से ये इकाइयाँ बिना शोधन के ही रासायनिक जल बाहर निकाल रही हैं। सवाल यह है कि बिना शोधन संयंत्र के इन इकाइयों को संचालन की अनुमति किसने दी? प्रशासन और प्रदूषण बोर्ड की चुप्पी इस पूरे प्रकरण पर गंभीर संदेह खड़ा करती है।
क्या निरीक्षण सिर्फ फाइलों में हो रहा है?
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रदूषण बोर्ड और प्रशासन की निष्क्रियता से यह समस्या भयावह रूप ले रही है। अधिकारी या तो आंखें बंद किए बैठे हैं या फिर औद्योगिक इकाइयों से मिलीभगत में हैं। जनता के बीच चर्चा आम है कि कानून आम लोगों के लिए है, उद्योगपतियों के लिए नहीं।
निष्कर्ष: मुनाफ़ाखोरी की कीमत चुका रही जनता
साई फाइटोसेयूटिकल्स प्राइवेट लिमिटेड जैसे कारखानों की मुनाफ़ाखोरी ने पूरे क्षेत्र को प्रदूषण के जाल में फंसा दिया है। यदि यही स्थिति रही तो मालनपुर आने वाले वर्षों में गंभीर जल संकट, भूमि की उर्वरता खत्म होने और जनस्वास्थ्य आपदा का केंद्र बन जाएगा। अब आवश्यक है कि प्रशासन तत्काल हस्तक्षेप करे, दोषियों पर कार्रवाई हो और पर्यावरण की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
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