Tuesday, July 9, 2024
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कलेक्टर साहब येसी क्या मजबूरी है कि राजकुमार गुप्ता ही जरूरी है?

-कलेक्टर के स्टेनो का 15 वर्षों से नियम विरुद्ध अटैचमेंट

-मुकेश शर्मा/वेब वार्ता

ग्वालियर। भिंड/ प्रदेश की मोहन यादव सरकार सरकार जनता के हित के कितने भी निर्णय ले परंतु सरकारी कारिंदे उसे धरातल पर नहीं उतरने देते। यहां हम चर्चा कर रहे हैं सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के दूसरे विभागों में अनुलग्न यानि अटेचमेंट की चंबल के भिंड जिले में सरकार के नहीं अधिकारियों के स्वयं के बनाए नियम और कानून चलते हैं! यहां पदस्थ अधिकारी इतनी मनमानी करते हैं कि जनता खून के आंसू रोने को मजबूर है। हम प्रश्न खड़ा कर रहे हैं भिंड कलेक्टर के स्टेनो राजकुमार गुप्ता की कलेक्ट्रेट में पदस्थपना/अटैचमेंट पर वैसे तो भू माफिया और रेत माफिया पर अंकुश लगाने में कलेक्टर नाकाम हैं ही पर इस कहानी को बाद में लिखेंगे फिलहाल बात करते हैं जिले की लहार तहसील के सिचाई विभाग के स्टेनो राजकुमार गुप्ता की, जो 15 वर्षो से लगातार नियम विरुद्ध कलेक्टर के स्टेनो बने हुए।अब सवाल यह खड़ा होता है कि कलेक्टर साहब येसी क्या मजबूरी है जो राजकुमार गुप्ता ही जरूरी है,जबकि आपके विभाग में राजकुमार गुप्ता से सीनियर और योग्य स्टेनो मौजूद हैं फिर सिचाई विभाग के स्टेनो पर मेहरावनी क्यों? राजकुमार गुप्ता को शासन प्रशासन के दर्जनों आदेशों के बाद सिचाई विभाग लहार को आपने वापस नहीं किया इस बात से लगता है कि मामले में कुछ न कुछ तो गड़बड़ है?स्टेनो राजकुमार गुप्ता नियम विरुद्ध कलेक्ट्रेट में 15 वर्षो से जमे हैं कई कलेक्टर आए और गए यहां तक कि बीच में 15 महीने कांग्रेस की सरकार भी रह गई पर क्या मजाल कोई गुप्ता को टस से मस कर सके?तब यही कहा जाएगा कि ये भिंड है जनाब यहां मुख्य मंत्री के नहीं अधिकारियों के नियम चलते हैं उन्ही के नियमों से चलता है शासन ।हालांकि चम्बल के भिंड जिले में अटैचमेंट के चलते अफसर हिटलर होगये हैं,भिंड जिले में करीब दो दर्जन से अधिक कर्मचारी से लेकर अफसर तक अटेचमेंट पर हैं तो कुछ यहां के अफसर अन्य विभागों में अटैच होकर मलाई खारहे हैं जैसे राजकुमार गुप्ता।यहां आम जनता के काम करने के लिए किसी अफसर और कर्मचारी के पास समय नहीं है।यही वजह है कि सरकारी दफ्तरों में लंबित फाइलों के अंबार लगे हैं।खास तौर पर राजस्व विभाग में और सबसे बड़ी समस्या होती है जहां एक कर्मचारी से लेकर बड़े अधिकारी तक को दूसरे विभाग या स्थान पर अटैच कर दिया जाता है और फिर खेल शुरू होता है आदेश आदेश खेलने का,हालांकि मामला मुख्यमंत्री मोहन यादव के संज्ञान में पहुंच चुका है देखते हैं क्या कार्यवाइ होती है?
भिंड जिला कलेक्टर कार्यालय में पदस्थ सिचाई विभाग के स्टेनो राजकुमार गुप्ता जो निरंतर 15 वर्षों से मूल विभाग छोड़कर प्रशासनिक मुखिया के अंग बनकर अंगद के पैर की तरह वर्षों से जमे हुए हैं और लगातार अफसरों पर राजनीतिक या आर्थिक दबाव बनवाकर शाशन के आदेश को ठेंगा दिखाकर सरकारी फरमान की धज्जियां उड़ा रहे हैं ।
कलेक्टर कार्यालय जिला भिंड में अटैच राजकुमार गुप्ता स्टेनो जिनकी पोस्टिंग जल संसाधन विभाग लहार में वर्ष 2007 में हुई थी। जहां से वो एक वर्ष बाद अर्थात 2008 से अपर कलेक्टर भिंड के कार्यालय में अटैच हो गए थे। इसके बाद वर्ष 2016 से स्टेनो टू कलेक्टर के यहां अटैच हैं। जबकि मप्र शासन सामान्य प्रशासन विभाग के स्पष्ट आदेश हैं कि अटैचमेंट समाप्त किए जाएं। इस संबंध में शासन द्वारा समय समय पर आदेश भी जारी किए गए हैं। जिसके अनुसार आदेश क्रमांक एफ/6_2/2012/एक/9, दिनांक 25.6.2013 द्वारा सभी प्रकार के संलग्नीकरण तत्काल समाप्त करने के निर्देश दिए गए हैं। इसी प्रकार आदेश दिनांक 18.1.2000, दिनांक 4.6.2019 एवं दिनांक 24.6.2021 से भी सभी प्रकार के अटैचमेंट समाप्त करने के निर्देश जारी किए गए हैं। शासन के इसी आदेश के आधार पर वर्ष 2018 में श्री गुप्ता का अटैचमेंट आदेश 21.12.2018 को समाप्त किया जाकर उन्हें मूल विभाग जल संसाधन लहार के लिए आदेश जारी किया गया था। परंतु इनके द्वारा पूर्व कलेक्टर धनराजू एस पर राजनैतिक /आर्थिक दवाब डलवाकर उक्त आदेश को उसी दिन निरस्त करवाया गया। इस प्रकार श्री गुप्ता स्टेनो टू कलेक्टर के पद पर नियम विरुद्ध तरीके से शासन आदेश के विपरीत अटैच बने हुए हैं। गौरतलब है कि पूर्व में इनका आदेश निर्वाचन कार्य को सम्पन्न कराने हेतु आदेश क्रमांक 7813 दिनांक 30.7.2020 से आगामी आदेश तक के लिए संयोजित किया गया था। जबकि निर्वाचन कार्य काफी लंबे समय पूर्व ही समाप्त हो चुका है। इसके बावजूद भी इन्हे आज दिनांक तक कार्यमुक्त नही किया गया है। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि श्री गुप्ता के मूल विभाग जल संसाधन द्वारा इन्हें वापिस किए जाने की मांग भी पत्र क्रमांक 360 दिनांक 14.2.2019 एवं पत्र क्रमांक 2054 दिनांक 17.7.2019 से की गई किंतु अभी तक इन्हें मूल विभाग में वापिस नही किया गया। इस प्रकार राजकुमार गुप्ता द्वारा शासन आदेशों के विरुद्ध अटैच रहकर कार्य किया जा रहा है। यहां यह भी ज्ञात हुआ है कि राजकुमार गुप्ता द्वारा अपने पद का दुरुपयोग करते हुए जल संसाधन विभाग से राजस्व विभाग में संविलियन की कार्यवाही हेतु नियमों के विपरीत शासन को कलेक्टर के माध्यम से पूर्व में प्रस्ताव भिजवाए गए हैं। जिसकी स्थापना शाखा में कोई कार्यवाही नहीं हुई। इनके द्वारा स्थापना शाखा का दुरुपयोग करते हुए पत्र प्रमुख राजस्व आयुक्त एवं प्रमुख सचिव राजस्व को पत्र क्रमांक क्यू/2ख/स्थापना/2018/2651_52 दिनांक 13.3.2018 एवं पत्र क्रमांक 280 दिनांक 27.6.2019 तथा पत्र क्रमांक 525 दिनांक 15.11.2019 से प्रमुख राजस्व आयुक्त भोपाल को पत्र भेजे गए हैं, जबकि वास्तिकता में इन पत्रों के संबंध में स्थापना शाखा अथवा प्रभारी अधिकारी स्थापना द्वारा कोई कार्यवाही ही नही की गई है। यही नहीं
कलेक्ट्रेट की जावक शाखा से उक्त पत्र क्रमांक 2651_2652 दिनांक 13.3.2018 के संबंध में दर्ज किया गया है कि बंद लिफाफा स्टेनो शाखा से प्राप्त होने का उल्लेख है। इसके अलावा पत्र क्रमांक 280 तथा पत्र क्रमांक 525 जावक पंजी में अन्य विभागों के नाम से दर्ज हैं। इस प्रकार कथित एवं कूट्रचित तरीके से पत्र भेजे गए हैं,जिनकी जांच भी की जाना आवश्यक है।
अब देखना यह है कि जिले के प्रशासनिक मुखिया, न्यायप्रिय तथा शासन आदेशों का पालन कराने वाले कलेक्टर द्वारा राजकुमार गुप्ता का अटैचमेंट समाप्त कर उनके मूल विभाग जल संसाधन लहार में वापिस भेजेंगे या दबाव और प्रभाव में मामला रफादफा हो जायेगा ?
बॉक्स में
क्या कलेक्टर जल संसाधन विभाग लहार से विगत 15 वर्षों से नियम विरुद्ध तरीके से अटैच स्टेनो राजकुमार गुप्ता को मूल विभाग में वापिस भेजेंगे या अपनों पर मेहरबानी जारी रहेगी?क्योंकि राजकुमार गुप्ता एक भाजपा नेता के रिश्तेदार होने के साथ साथ पूर्व नेता प्रतिपक्ष डॉ गोविंद सिंह के भी खास हैं तभी तो गुप्ता के सिचाई विभाग से राजस्व विभाग में संविलियन के लिए पत्र लिखा था।अब जब मामला मुख्यमंत्री के संज्ञान में पहुंच चुका है और वर्तमान विधानसभा सत्र में प्रदेश में अन्य विभागों में अटैच कर्मचारियों को उनके मूल विभाग में वापस भेजने और संख्या बताने के लिए विधानसभा प्रश्न भी लगा हुआ है पर अब देखना यह है कि विधानसभा और मुख्यमंत्री के आदेशों,निर्देशों का पालन होता है या नहीं?कलेक्टर, निर्वचन यातायात जिला भिंड के आदेश क्यू/निर्वाचन/याता०/2008/1717 दिनांक 6.10.2008 द्वारा यातायात शाखा में 7 कर्मचारियों को अटैच किया गया था।जिसमे से 6 कर्मचारियों को चुनाव बाद विभाग में वापिस कर दिया गया था। राजकुमार को अटैच बनाए रखा गया। इसके बाद इन्हें नियम विरुद्ध तरीके से स्टेनो तो कलेक्टर के पद पर पदस्थ किया गया। बाद में 1 वर्ष के लिए री डिप्लॉयमेंट किया गया। तथा इसके बाद निर्वाचन कार्य में संयोजित किया गया। वर्तमान में इनका स्टेनो के लिए कोई आदेश भी नही है। इसके बाद इनके द्वारा कार्य किस आधार पर किया जा रहा है। जबकि वर्तमान आदेश अनुसार राजकुमार 3 निर्वाचन कार्य के लिए संयोजित हैं स्टेनो के लिए नहीं।

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