Monday, February 16, 2026
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छत्तीसगढ़ कैबिनेट बैठक में कई अहम फैसले, शिक्षा गुणवत्ता अभियान, कलाकार पेंशन में वृद्धि और औद्योगिक नीति में संशोधन को मंजूरी

रायपुर, 14 मई (वेब वार्ता)। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में मंत्रालय (महानदी भवन) में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में राज्य हित से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक में शिक्षा, उद्योग, कला और युवाओं के हित में अहम निर्णय लिए गए। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत राज्य के शासकीय स्कूलों में ‘‘मुख्यमंत्री शिक्षा गुणवत्ता अभियान’’ चलाया जाएगा। इस अभियान का उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार, पालक-शिक्षक सहभागिता बढ़ाना और शैक्षणिक उपलब्धियों को उन्नत करना है। इसके तहत स्कूलों का सामाजिक अंकेक्षण कर ग्रेडिंग की जाएगी और कमजोर स्कूलों की नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी। साथ ही, शिक्षकों को मॉडल स्कूलों का शैक्षणिक भ्रमण कराया जाएगा। राज्य सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर कलाकारों और साहित्यकारों के लिए राहत देते हुए पेंशन राशि को ₹2000 से बढ़ाकर ₹5000 प्रति माह कर दिया है। यह संशोधन संस्कृति विभाग की वित्तीय सहायता योजना नियम-1986 में किया गया है। इस निर्णय से वर्तमान 162 लाभार्थियों को अब सालाना ₹60,000 पेंशन मिलेगी, जिससे राज्य पर ₹58.32 लाख का अतिरिक्त भार आएगा। औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मंत्रिपरिषद ने ‘छत्तीसगढ़ औद्योगिक भूमि एवं भवन प्रबंधन नियम, 2015’ में संशोधन को मंजूरी दी। इससे भूमि आबंटन की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और स्पष्ट होगी। कैबिनेट ने राज्य की नई औद्योगिक नीति 2024-30 में कई बदलावों को मंजूरी दी है, जिससे रोजगार और निवेश को बढ़ावा मिलेगा।छत्तीसगढ़वासियों को नौकरी देने वाली कंपनियों को अनुदान मिलेगा। हाइड्रोपोनिक और ऐयरोपोनिक जैसी आधुनिक खेती को बढ़ावा मिलेगा। युवाओं के लिए खेल अकादमियों और ट्रेनिंग सेंटर को प्रोत्साहन मिलेगा। टेक्सटाइल उद्योग को 200% तक प्रोत्साहन मिलेगा। बस्तर और सरगुजा में होटल-रिसॉर्ट निर्माण के लिए न्यूनतम निवेश सीमा घटाई गई है। लॉजिस्टिक नीति लागू कर राज्य को लॉजिस्टिक हब बनाया जाएगा। दिव्यांगजनों को योजनाओं का अधिक लाभ देने हेतु परिभाषा में संशोधन किया गया है। ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर, रक्षा एवं एयरोस्पेस जैसे क्षेत्रों को विशेष पैकेज दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त, मल्टीप्लेक्स युक्त मिनी मॉल और निजी स्कूलों को भी थ्रस्ट सेक्टर में शामिल किया जाएगा, जिससे शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में सुविधाएं बढ़ सकें।

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