ऊर्जा संकट के बीच भारत में पीएनजी विस्तार तेज, सरकार ने अफवाहों से बचने की अपील

नई दिल्ली, 04 अप्रैल (वेब वार्ता)। मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर संकट के बीच भारत ने घरेलू स्तर पर गैस वितरण को मजबूत करने की दिशा में तेजी दिखाई है। Ministry of Petroleum and Natural Gas के अनुसार देश में पाइप्ड नेचुरल गैस कनेक्शनों का विस्तार तेजी से हो रहा है।

मंत्रालय ने बताया कि मार्च 2026 से अब तक 3.42 लाख नए पीएनजी कनेक्शन सक्रिय किए जा चुके हैं, जबकि 3.7 लाख नए पंजीकरण भी दर्ज किए गए हैं। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को नए कनेक्शन उपलब्ध कराने में सहयोग करने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।

ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता, घबराने की जरूरत नहीं

सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित है। नागरिकों से अपील की गई है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें और अनावश्यक रूप से ईंधन या एलपीजी की बुकिंग न करें।

लोगों को सलाह दी गई है कि एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग डिजिटल माध्यम से करें और बिना जरूरत गैस एजेंसी जाने से बचें।

वैकल्पिक ईंधनों के उपयोग पर जोर

मंत्रालय ने पीएनजी, इंडक्शन और इलेक्ट्रिक कुकटॉप जैसे वैकल्पिक ईंधनों के उपयोग को बढ़ावा देने की अपील की है। साथ ही ऊर्जा की बचत को भी वर्तमान परिस्थितियों में आवश्यक बताया गया है।

सरकार ने नागरिकों से केवल आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करने और किसी भी भ्रामक जानकारी से दूर रहने का आग्रह किया है।

घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता

ईरान से जुड़े तनाव के बीच सरकार ने घरेलू एलपीजी और पीएनजी आपूर्ति को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। इसके अलावा अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों को भी प्राथमिकता दी जा रही है।

आपूर्ति बनाए रखने के लिए रिफाइनरी उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ एलपीजी बुकिंग अंतराल को शहरी क्षेत्रों में 21 से बढ़ाकर 25 दिन और ग्रामीण क्षेत्रों में 45 दिन तक किया गया है।

कोयला और छोटे सिलेंडरों पर भी जोर

ऊर्जा मांग को संतुलित करने के लिए वैकल्पिक ईंधनों जैसे केरोसिन और कोयला की उपलब्धता भी बढ़ाई जा रही है। सरकार ने राज्यों को अधिक कोयला आवंटित करने के निर्देश दिए हैं।

इसके साथ ही 5 किलोग्राम वाले छोटे एलपीजी सिलेंडरों के वितरण को बढ़ावा दिया जा रहा है। 23 मार्च से अब तक 5 लाख से अधिक छोटे सिलेंडर बेचे जा चुके हैं, जिनमें से 2 अप्रैल को ही 67 हजार से अधिक बिक्री दर्ज की गई।

कुल मिलाकर, वैश्विक ऊर्जा संकट के बावजूद भारत ने घरेलू आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देने की दिशा में सक्रिय कदम उठाए हैं, जिससे आम उपभोक्ताओं पर असर कम से कम पड़े।

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