BMC Polls मुंबई BMC चुनाव 2026: महायुति की ‘महा’ जीत, BJP-शिंदे गुट ने 114 के बहुमत का आंकड़ा पार किया, ठाकरे भाइयों का 25 साल पुराना किला ढहा

मुंबई, विशेष संवाददाता | वेब वार्ता

BMC Polls: बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव 2026 के रुझानों ने महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा उलटफेर कर दिया है। महायुति गठबंधन (BJP और शिंदे गुट की शिवसेना) ने बहुमत का जादुई आंकड़ा पार कर लिया है, जबकि ठाकरे भाइयों (उद्धव ठाकरे की शिवसेना UBT और राज ठाकरे की MNS) का 25 साल पुराना गढ़ ढह गया है। काउंटिंग के रुझानों में महायुति 119 वार्डों पर आगे चल रही है, जिसमें BJP अकेले 88-98 वार्डों पर बढ़त बनाए हुए है। बहुमत के लिए 114 वार्डों की जरूरत है, और रुझानों से साफ है कि BJP पहली बार BMC में बहुमत हासिल कर रही है।

यह जीत मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली महायुति के लिए ऐतिहासिक है। 2017 में BJP को 82 और उद्धव ठाकरे की शिवसेना को 84 सीटें मिली थीं, लेकिन इस बार ठाकरे गुट 64 वार्डों पर सिमटता नजर आ रहा है। MNS को सिर्फ 6 वार्डों पर बढ़त मिल रही है, जबकि कांग्रेस 5 पर।

मतदान प्रतिशत और अन्य महानगरपालिकाओं के रुझान

BMC चुनाव में 52.94% मतदान हुआ। अन्य प्रमुख महानगरपालिकाओं में मतदान प्रतिशत इस प्रकार रहा:

महानगरपालिकामतदान प्रतिशत (%)
छत्रपति संभाजीनगर59.82
पिंपरी-चिंचवड57.71
नवी मुंबई57.15
वसई-विरार57.12
ठाणे55.59
मुंबई (BMC)52.94
पुणे52.42
नागपुर51
मीरा-भाईंदर48.64
कल्याण-डोंबिवली45

अन्य महानगरपालिकाओं में भी महायुति आगे चल रही है। पिंपरी-चिंचवड, ठाणे, नवी मुंबई, वसई-विरार, मीरा भायंदर, नागपुर में गठबंधन की मजबूत स्थिति है।

एग्जिट पोल्स ने पहले ही दिए थे संकेत

एग्जिट पोल्स में महायुति की जीत का अनुमान लगाया गया था। JVC एग्जिट पोल के अनुसार महायुति को 138 वार्ड, UBT शिवसेना को 59 और कांग्रेस गठबंधन को 23 वार्ड मिलने का अनुमान था। रुझान इन अनुमानों से मेल खाते हैं। एग्जिट पोल्स ने बताया कि महायुति को उत्तर और दक्षिण भारत से आए प्रवासी मतदाताओं का बड़ा समर्थन मिला, जबकि मराठा वोटों का हिस्सा भी गठबंधन की ओर गया। ठाकरे भाई मराठी और मुस्लिम वोटों को पूरी तरह एकजुट करने में असफल रहे।

ठाकरे भाइयों का किला ढहने के कारण

25 सालों से BMC पर शिवसेना (अविभाजित) का कब्जा था, लेकिन इस बार उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे की पार्टियां अलग-अलग लड़ीं। महायुति ने विकास, बुनियादी सुविधाएं और शहर की साफ-सफाई जैसे मुद्दों पर फोकस किया, जिससे मतदाताओं का रुझान उनकी ओर हुआ। विशेषज्ञों का मानना है कि उद्धव की ‘बड़ी गलती’ राज से हाथ मिलाना था, जिससे मराठी अस्मिता का मुद्दा कमजोर पड़ा।

निष्कर्ष: महायुति की जीत से मुंबई में नई राजनीति की शुरुआत

BMC चुनावों में महायुति की यह जीत मुंबई की राजनीति में नया अध्याय लिखेगी। भाजपा का पहली बार बहुमत पाना ठाकरे परिवार की विरासत को बड़ा झटका है। अब महायुति को शहर के विकास, ट्रैफिक, प्रदूषण और बुनियादी सुविधाओं पर फोकस करने का मौका मिलेगा। विपक्षी दलों को अब अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करना होगा। रुझानों से साफ है कि महाराष्ट्र में महायुति का दबदबा बढ़ रहा है।

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