Sunday, March 1, 2026
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मराठी भाषा को शास्त्रीय दर्जा: एकनाथ शिंदे बोले- ‘हमारे लिए यह सम्मान का विषय, वोटों का नहीं’; महाराष्ट्र सरकार उठाएगी बड़े कदम

मुंबई | वेब वार्ता

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने मराठी भाषा को अक्टूबर 2024 में मिले शास्त्रीय भाषा के दर्जे पर खुशी जताई और इसे महायुति सरकार के लिए गर्व का क्षण बताया। मंगलवार को ‘अभिजात मराठी भाषा गौरव सोहला’ कार्यक्रम में उन्होंने कहा, “मराठी भाषा हमारे लिए वोटों का मुद्दा नहीं, बल्कि सम्मान और गर्व का प्रतीक है।” शिंदे ने जोर देकर कहा कि मराठी के संरक्षण और प्रचार के लिए धन की कोई कमी नहीं होगी।

मराठी भाषा: सम्मान का प्रतीक, राजनीति का नहीं-एकनाथ शिंदे

शिंदे ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा, “कुछ लोग मराठी भाषा का इस्तेमाल वोटों के लिए करते हैं, लेकिन हमारे लिए यह सम्मान और संस्कृति का विषय है।” उन्होंने बताया कि मराठी को शास्त्रीय दर्जा दिलाने का प्रस्ताव उनके मुख्यमंत्री कार्यकाल में केंद्र सरकार को भेजा गया था। केंद्र के इस फैसले को उन्होंने मराठी भाषियों के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि करार दिया।

मराठी संरक्षण के लिए ठोस कदम

महायुति सरकार मराठी भाषा के संरक्षण और विकास के लिए कई कदम उठा रही है। शिंदे ने प्रमुख पहलों का जिक्र किया:

  • स्कूलों में अनिवार्य मराठी: कक्षा 12 तक मराठी पढ़ाना अनिवार्य किया गया।
  • तकनीकी शिक्षा में मराठी: तकनीकी और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में मराठी के उपयोग को बढ़ावा।
  • मराठी साहित्य सम्मेलन का बजट: लाखों से बढ़ाकर करोड़ों रुपये किया गया।
  • मराठी भाषा भवन: मुंबई और लंदन में मराठी भाषा भवन का निर्माण।
  • विश्वविद्यालयों में मराठी: देशभर की यूनिवर्सिटियों में मराठी पढ़ाने की योजना।
  • सिविल सेवा और सेना में मराठी: केंद्र और राज्य सरकार मिलकर सिविल सेवा, PSU, बैंकों और सेना में मराठी बोलने वालों की भर्ती बढ़ाएंगी।

शिंदे ने कहा, “जरूरत पड़ी तो अन्य मदों से फंड कम कर मराठी भाषा के लिए धन आवंटित किया जाएगा।”

शास्त्रीय दर्जे का महत्व

मराठी को शास्त्रीय भाषा का दर्जा मिलने से इसकी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को वैश्विक पहचान मिलेगी। यह दर्जा भाषा के संरक्षण, अनुसंधान और प्रचार के लिए केंद्र से अतिरिक्त फंड और संसाधन सुनिश्चित करता है। शिंदे ने कहा, “यह मराठी भाषियों के लिए गर्व का क्षण है। हम इसे और मजबूत करेंगे।”

जनता और विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया

  • मराठी साहित्यकार: साहित्यकारों ने इसे मराठी की वैश्विक पहचान बढ़ाने वाला कदम बताया। एक लेखक ने कहा, “यह मराठी साहित्य और संस्कृति को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।”
  • स्थानीय लोग: मुंबई और पुणे के निवासियों ने सरकार के प्रयासों की सराहना की। एक नागरिक ने कहा, “मराठी हमारी पहचान है। इसे अनिवार्य करना गर्व की बात है।”
  • विपक्ष का जवाब: विपक्षी नेताओं ने इसे “चुनावी स्टंट” करार दिया, लेकिन शिंदे ने कहा, “हमारा काम बोलता है, वोट नहीं मांगता।”

भविष्य की योजनाएं

शिंदे ने कहा कि मराठी को वैश्विक मंच पर ले जाने के लिए और प्रयास किए जाएंगे। लंदन में मराठी भवन मराठी डायस्पोरा को जोड़ेगा, जबकि विश्वविद्यालयों में मराठी अध्ययन केंद्र स्थापित किए जाएंगे।

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