नई दिल्ली, डेस्क | वेब वार्ता
देश में इन दिनों एलपीजी सिलेंडर की कमी की खबरों के बीच आम लोगों में चिंता बढ़ी है। मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण सप्लाई चेन प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है, जिससे कुछ जगहों पर डिलीवरी में देरी देखने को मिली है। हालांकि केंद्र सरकार ने साफ किया है कि देश में एलपीजी की कोई कमी नहीं है। इस बीच इंडियन ऑयल और बीपीसीएल जैसी गैस कंपनियों ने कुछ आसान टिप्स साझा किए हैं, जिनसे आप घरेलू गैस की खपत में 25% तक कमी ला सकते हैं।
कैसे बचाएं LPG गैस? अपनाएं ये स्मार्ट तरीके
| टिप्स | संभावित बचत |
|---|---|
| उबाल आने के बाद धीमी आंच | 10-15% गैस बचत |
| प्रेशर कुकर का इस्तेमाल | 30-50% तक बचत |
| भिगोकर पकाना | 20-40% समय व गैस बचत |
| ढक्कन लगाकर पकाना | 30% तक बचत |
गैस कंपनियों के अनुसार, खाना पकाते समय सही तकनीक अपनाने से न सिर्फ गैस की बचत होती है, बल्कि खाना भी बेहतर तरीके से पकता है। तेज आंच पर खाना जल्दी नहीं बनता, बल्कि गैस की खपत बढ़ जाती है।
- बर्नर को नियमित साफ रखें, ताकि फ्लेम नीली रहे
- बर्तन का सही साइज चुनें, जिससे फ्लेम बाहर न जाए
- एक साथ कई चीजें पकाएं (बैच कुकिंग)
- छोटे कामों के लिए इंडक्शन या माइक्रोवेव का उपयोग करें
घरेलू खपत और बदलती स्थिति
भारत में एलपीजी की घरेलू खपत सबसे ज्यादा है, जो कुल उपयोग का लगभग 86% हिस्सा है। पिछले कुछ समय से वैश्विक बाजार में गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है, जिससे लोग घबराकर पहले से ज्यादा बुकिंग कर रहे हैं।
सरकार और कंपनियों की सलाह
| पहल | विवरण |
|---|---|
| बुकिंग अंतराल | 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन |
| उद्देश्य | कालाबाजारी रोकना |
| सरकारी आश्वासन | एलपीजी की कोई कमी नहीं |
सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें। साथ ही, गैस कंपनियां भी उपभोक्ताओं को समझदारी से उपयोग करने की सलाह दे रही हैं।
कितनी हो सकती है बचत?
विशेषज्ञों के अनुसार, इन छोटे-छोटे बदलावों को अपनाकर कुल मिलाकर 25-30% तक गैस की बचत की जा सकती है। इससे एक सिलेंडर 10 से 15 दिन ज्यादा चल सकता है और महीने में करीब 200 से 300 रुपये तक की बचत संभव है।
निष्कर्ष
एलपीजी को लेकर फैल रही अफवाहों के बीच यह जरूरी है कि लोग घबराने के बजाय जागरूकता और समझदारी से काम लें। सही उपयोग और छोटे बदलावों के जरिए न केवल खर्च कम किया जा सकता है, बल्कि संकट की स्थिति में भी गैस की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकती है।
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