नई दिल्ली, डेस्क | वेब वार्ता
अस्पतालों में तेजी से बढ़ रहे मल्टीड्रग-रेसिस्टेंट (MDR) बैक्टीरिया अब आम एंटीबायोटिक्स से नियंत्रित नहीं हो पा रहे हैं, जिससे गंभीर संक्रमणों का खतरा बढ़ गया है। इसी बीच वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज और सफदरजंग अस्पताल के वैज्ञानिकों के एक अध्ययन में नई उम्मीद सामने आई है। शोध में पाया गया कि सेफ्टाजिडाइम-एविबैक्टम (CZA) और एज्ट्रियोनाम (ATM) का संयुक्त उपयोग कार्बापेनेम-रेसिस्टेंट एंटरोबैक्टेरेल्स (CRE) के खिलाफ प्रभावी साबित हो सकता है।
अध्ययन में क्या पाया गया?
| पहलू | विवरण |
|---|---|
| अध्ययन अवधि | अक्तूबर 2023 – जुलाई 2024 |
| नमूने | 60 बैक्टीरिया सैंपल |
| मुख्य लक्ष्य | CRE बैक्टीरिया पर दवाओं की प्रभावशीलता |
| सकारात्मक परिणाम | 73% मामलों में प्रभाव (सिनर्जी) |
शोध में पाया गया कि इन दो एंटीबायोटिक्स के संयोजन से लगभग 73% नमूनों में बैक्टीरिया पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा, जो गंभीर संक्रमणों के इलाज में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
NDM जीन बना बड़ी चुनौती
अध्ययन में शामिल अधिकांश बैक्टीरिया में NDM (New Delhi Metallo-beta-lactamase) जीन पाया गया, जो बैक्टीरिया को कई एंटीबायोटिक्स के प्रति प्रतिरोधी बना देता है। यह जीन अस्पतालों में संक्रमण के इलाज को और जटिल बना देता है।
- NDM जीन से बढ़ता है दवा प्रतिरोध
- गंभीर संक्रमणों का इलाज होता है कठिन
- अस्पतालों में संक्रमण का खतरा बढ़ता है
कौन-सा टेस्ट सबसे सटीक?
| तकनीक | विशेषता |
|---|---|
| E-Strip | सबसे सटीक, लेकिन महंगी |
| Disk Replacement | सस्ती और आसान |
| Inverse D-Test | व्यावहारिक और भरोसेमंद |
शोध में E-Strip तकनीक को सबसे सटीक पाया गया, हालांकि इसकी लागत अधिक होने के कारण यह हर प्रयोगशाला के लिए संभव नहीं है। वहीं अन्य तकनीकें कम खर्चीली और उपयोग में आसान पाई गईं।
स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए बड़ा संकेत
विशेषज्ञों का मानना है कि यह खोज डॉक्टरों और अस्पतालों के लिए नई दिशा प्रदान करती है। इससे भविष्य में मल्टीड्रग-रेसिस्टेंट बैक्टीरिया से होने वाले संक्रमणों को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
निष्कर्ष
एंटीबायोटिक प्रतिरोध आज वैश्विक स्वास्थ्य के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुका है। ऐसे में CZA और ATM का संयोजन एक प्रभावी विकल्प के रूप में उभर सकता है। हालांकि, इसके व्यापक उपयोग से पहले और शोध की आवश्यकता होगी, लेकिन यह खोज चिकित्सा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
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