-सुनील कुमार महला-
किसी कवि ने ठीक ही कहा है-‘समय-समय की वार्ता, समय-समय का फेर, समय लगा दे ठाठ-बाट, जाते न लागे देर।’ अर्थात समय बहुत शक्तिशाली होता है। वह कब किसी को ऊँचाई पर पहुँचा दे और कब सब कुछ बदल दे, यह कोई नहीं जानता। मनुष्य के जीवन में समय का बहुत बड़ा महत्व है, लेकिन दुख की बात यह है कि अधिकांश लोग इसकी सही कीमत नहीं समझते। जो व्यक्ति समय का सम्मान करता है और उसका सदुपयोग करना जानता है, वह जीवन के किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं रहता। हमें यह याद रखना चाहिए कि बीता हुआ समय कभी लौटकर नहीं आता। इसीलिए संस्कृत में कहा गया है कि-‘गतः कालो नायाति।’
समय के साथ यदि हम कार्य में मेहनत करते हैं तो हमें सफलता की प्राप्ति होती है। हमारे यहां संस्कृत में बड़े ही खूबसूरत शब्दों में यह कहा गया है कि-‘उद्यमेन हि सिद्ध्यन्ति कार्याणि न मनोरथैः।”अर्थात- कार्य केवल इच्छा करने से नहीं, बल्कि समय पर परिश्रम करने से सिद्ध होते हैं।’ याद रखिए कि ईश्वर ने संसार के प्रत्येक व्यक्ति को समान रूप से चौबीस घंटे दिए हैं। चाहे कोई अमीर हो या गरीब, विद्यार्थी हो या अधिकारी, समय सबके लिए बराबर है। अंतर केवल इतना होता है कि कोई व्यक्ति अपने समय को अच्छे कार्यों में लगाता है, जबकि कोई उसे आलस्य, बेकार की बातों और निरर्थक कार्यों में गंवा देता है। आजकल हर व्यक्ति यह कहते हुए दिखाई देता है कि उसके पास समय नहीं है, लेकिन वास्तव में समय की कमी नहीं होती, बल्कि समय के सही उपयोग की कमी होती है। समय लगातार चलता रहता है। वह कभी किसी का इंतजार नहीं करता। जो व्यक्ति समय के साथ चलना सीख लेता है, वही आगे बढ़ता है।
अक्सर मनुष्य समय को अपना शत्रु मान लेता है। उसे लगता है कि समय बहुत जल्दी निकल रहा है या उसके पास पर्याप्त समय नहीं है। इसी सोच के कारण वह तनाव और चिंता में रहने लगता है। लेकिन समय न कभी जल्दी करता है और न देर, वह अपनी गति से चलता रहता है। जब हम समय से लड़ते हैं, तो केवल थकते हैं, लेकिन जब हम समय को समझते हैं और उसके साथ चलना सीखते हैं, तब वही समय हमें बहुत कुछ सिखाता है। समय हमें धैर्य, अनुभव, समझ और परिपक्वता प्रदान करता है। जीवन का हर चरण अपने साथ कोई न कोई सीख लेकर आता है। बचपन, युवावस्था और वृद्धावस्था-हर अवस्था का अपना महत्व होता है। जो व्यक्ति हर पल को अच्छे ढंग से जीता है और हर अनुभव से सीखता है, वही जीवन का वास्तविक आनंद प्राप्त करता है।
समय के साथ मित्रता करने का अर्थ है कि हम अपने वर्तमान को स्वीकार करें और हर कार्य को सही समय पर पूरा करें। यदि विद्यार्थी समय पर अध्ययन करे, किसान समय पर खेती करे और कर्मचारी समय पर अपना कार्य करे, तो सफलता निश्चित रूप से मिलती है। हर क्षण का, हर पल का सदुपयोग जरूरी है। जैसा कि संस्कृत में कहा गया है कि-‘क्षणशः कणशश्चैव विद्यामर्थं च साधयेत्।क्षणत्यागे कुतो विद्या कणत्यागे कुतो धनम्॥’ इसका मतलब यह है कि क्षण-क्षण और कण-कण का सदुपयोग करके ही विद्या और धन प्राप्त होते हैं। यदि क्षण नष्ट कर देंगे तो विद्या कैसे मिलेगी और कण न बचाएँगे तो धन कैसे आएगा। इतिहास गवाह है कि जिन्होंने समय का सम्मान किया, उन्होंने जीवन में बड़ी उपलब्धियाँ प्राप्त कीं। वहीं जो लोग समय को व्यर्थ गंवाते रहे, उन्हें बाद में पछताना पड़ा।
इसलिए हमें समय की कीमत समझनी चाहिए और उसे व्यर्थ नहीं गंवाना चाहिए। समय सबसे मूल्यवान धन है, क्योंकि एक बार बीता हुआ समय कभी वापस नहीं आता। यदि हम अपने समय का सदुपयोग अच्छे कार्यों, मेहनत और सकारात्मक सोच में करें, तो जीवन निश्चित रूप से सफल और सुखद बन सकता है। समय पर किया गया कर्म ही सफलता का आधार होता है।
(लेखक फ्रीलांस राइटर, कॉलमिस्ट व युवा साहित्यकार है)

