नई दिल्ली, विशेष संवाददाता | वेब वार्ता
अमेरिका को दुनिया की सुपरपावर कहा जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इतिहास में एक इकलौता देश ऐसा था जिसने अमेरिका से सीधा पंगा लिया और इसका अंजाम इतना खौफनाक हुआ कि पूरी दुनिया सिहर उठी? वह देश था जापान। 7 दिसंबर 1941 को जापान ने अमेरिकी नौसेना बेस पर्ल हार्बर पर अचानक हमला कर दिया। यह हमला अमेरिका के लिए अप्रत्याशित था, लेकिन इसका नतीजा जापान के लिए विनाशकारी साबित हुआ। चार साल बाद अमेरिका ने हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराकर जापान को घुटनों पर ला दिया। यह दुनिया में पहली और अब तक आखिरी बार किसी देश पर परमाणु हथियार का इस्तेमाल था। यह घटना आज भी मानवता के लिए सबक है कि महाशक्तियों से टकराना कितना महंगा पड़ सकता है।
पर्ल हार्बर हमला: जापान की महत्वाकांक्षा
7 दिसंबर 1941 को जापानी विमानों ने हवाई के पर्ल हार्बर पर हमला बोला। अमेरिकी नौसेना के कई जहाज डूब गए, हवाई जहाज तबाह हो गए। इस हमले में 2403 अमेरिकी मारे गए और 1178 घायल हुए। जापान का मकसद प्रशांत महासागर में वर्चस्व कायम करना और अमेरिका को युद्ध से दूर रखना था। लेकिन यह हमला अमेरिका के लिए ‘इन्फेमी का दिन’ बन गया। राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट ने इसे ‘शर्मनाक दिन’ कहा और अमेरिका द्वितीय विश्व युद्ध में कूद पड़ा। जापान ने सोचा था कि यह आश्चर्यजनक हमला अमेरिका को कमजोर कर देगा, लेकिन उल्टा हुआ – अमेरिका की पूरी ताकत जाग गई।
चार साल का खूनी युद्ध: जापान की हार
हमले के बाद प्रशांत महासागर में द्वीप-द्वीप पर लड़ाई हुई। अमेरिकी सेना ने जापान को पीछे धकेला। जापान की सेना कमजोर पड़ती गई, लेकिन हार मानने को तैयार नहीं थी। तब अमेरिका ने परमाणु बम का इस्तेमाल करने का फैसला लिया।
हिरोशिमा-नागासाकी: मानवता पर काला धब्बा
6 अगस्त 1945 को ‘लिटिल बॉय’ बम हिरोशिमा पर गिराया गया। पूरा शहर तबाह, 70 हजार से ज्यादा तुरंत मारे गए। 9 अगस्त को ‘फैट मैन’ नागासाकी पर गिरा। कुल 1.5 से 2 लाख लोग मारे गए, आने वाली पीढ़ियां विकिरण से प्रभावित हुईं। सोवियत संघ ने भी हमला बोला। जापान के पास चारा नहीं बचा। 15 अगस्त 1945 को सम्राट हिरोहितो ने सरेंडर की घोषणा की। 2 सितंबर को औपचारिक सरेंडर हुआ।
प्रमुख तथ्य एक नजर में
| घटना | तिथि | नुकसान/प्रभाव |
|---|---|---|
| पर्ल हार्बर हमला | 7 दिसंबर 1941 | 2403 अमेरिकी मारे गए |
| हिरोशिमा बम | 6 अगस्त 1945 | 70 हजार+ तुरंत मौत |
| नागासाकी बम | 9 अगस्त 1945 | हजारों मौत, विकिरण प्रभाव |
| जापान सरेंडर | 15 अगस्त 1945 | द्वितीय विश्व युद्ध समाप्त |
यह तालिका घटनाओं के मुख्य बिंदुओं को दर्शाती है।
सबक: महाशक्ति से टकराने का अंजाम
जापान का यह पंगा दुनिया का इकलौता उदाहरण है जहां किसी देश ने उभरती महाशक्ति अमेरिका से सीधे टक्कर ली। परमाणु हमले ने पूरी दुनिया को डरा दिया। तब से कोई देश अमेरिका से ऐसा पंगा नहीं ले सका। यह घटना मानवता के लिए चेतावनी है कि युद्ध का अंजाम कितना विनाशकारी हो सकता है।
निष्कर्ष: इतिहास का काला अध्याय
पर्ल हार्बर से हिरोशिमा-नागासाकी तक की यह कहानी शक्ति के दुरुपयोग और युद्ध की भयावहता को दर्शाती है। जापान की महत्वाकांक्षा और अमेरिका की प्रतिक्रिया ने लाखों जिंदगियां छीन लीं। आज भी यह इतिहास का काला अध्याय है, जो शांति और संयम का संदेश देता है। दुनिया को ऐसे युद्धों से सबक लेना चाहिए।
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