सरकार ‘विकसित दिल्ली संकल्प पत्र’ को मार्गदर्शक दस्तावेज के रूप में अपनाएगी: उपराज्यपाल सक्सेना

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नई दिल्ली, (वेब वार्ता)। दिल्ली के उपराज्यपाल वी. के. सक्सेना ने मंगलवार को कहा कि दिल्ली सरकार लोगों से किए गए वादों को पूरा करने के लिए मार्गदर्शक दस्तावेज के रूप में ‘विकसित दिल्ली संकल्प पत्र’ को अपनाएगी।

नवगठित आठवीं दिल्ली विधानसभा को संबोधित करते हुए सक्सेना ने राष्ट्रीय राजधानी के लिए दिल्ली सरकार के दृष्टिकोण और प्राथमिकताओं को रेखांकित किया।

उन्होंने कहा कि नई सरकार भ्रष्टाचार मुक्त शासन, महिला सशक्तीकरण, स्वच्छ दिल्ली, यमुना के कायाकल्प और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने पर ध्यान केंद्रित करेगी।

उपराज्यपाल ने दावा किया कि पिछले एक दशक से लगातार राजनीतिक टकराव और आरोप-प्रत्यारोप के कारण दिल्ली की प्रगति बाधित हुई है। उन्होंने कहा कि प्रभावी शासन सुनिश्चित करने के लिए नई सरकार केंद्र और अन्य राज्यों के साथ समन्वय में काम करेगी।

नई सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं को सूचीबद्ध करते हुए सक्सेना ने भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन, बेहतर शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, गरीबों का कल्याण, विश्व स्तरीय सड़कें, प्रदूषण मुक्त दिल्ली, स्वच्छ पेयजल, अनधिकृत कॉलोनियों के नियमितीकरण और यमुना के पुनरुद्धार सहित कई क्षेत्रों पर प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि सभी विभागों को इन प्राथमिकताओं के क्रियान्वयन के लिए 100 दिन की कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया गया है।

उन्होंने कहा कि सरकार सत्र के दौरान नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट भी पेश करेगी, ताकि पिछली सरकार की कमियों का विश्लेषण किया जा सके और सुधार के लिए खाका तैयार किया जा सके।

आम आदमी पार्टी (आप) के नेतृत्व वाली सरकार की आलोचना करते हुए सक्सेना ने कहा, ‘‘मेरी सरकार का प्राथमिक उद्देश्य धुंआधार विज्ञापन के जरिए छिपाई गई घटिया व्यवस्था को खत्म करना और शासन को फिर से पटरी पर लाना होगा।’’

इससे पहले दिन में विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने सक्सेना के अभिभाषण के दौरान नारेबाजी करने के आरोप में विपक्ष की नेता आतिशी समेत 12 आप विधायकों को सदन की कार्यवाही से निलंबित कर दिया।

आप के जिन नेताओं को सदन की कार्यवाही से निलंबित किया गया है उनमें आतिशी, गोपाल राय, वीर सिंह धींगान, मुकेश अहलावत, चौधरी जुबैर अहमद, अनिल झा, विषेश रवि और जरनैल सिंह शामिल हैं।

अपने निलंबन के बाद आतिशी ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर मुख्यमंत्री कार्यालय से बी. आर. आंबेडकर की तस्वीर हटाने और उनका अपमान करने का आरोप लगाया।

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के नेतृत्व वाले प्रशासन ने दिल्ली सचिवालय और विधानसभा दोनों में मुख्यमंत्री के कार्यालय से आंबेडकर के चित्रों को हटा दिया है।

उन्होंने प्रेस वार्ता में कहा, ‘‘भाजपा ने बाबासाहेब आंबेडकर के चित्र को हटाकर अपना असली रंग दिखाया है। क्या वह मानती है कि (नरेन्द्र) मोदी बाबासाहेब की जगह ले सकते हैं?’’

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