रांग नंबर ने सुलझायी रिश्तों की उलझी डोर

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नई दिल्ली, (वेब वार्ता)। रिश्तों के उलझे ताने बाने को सुलझाता नाटक रांग नंबर देख दर्शक अपने आस पास के जीवन में खो गए। शनिवार को राजधानी के अक्षरा थिएटर में कानुपर के अनुकृति रंगमंडल द्वारा प्रस्तुत नाटक के किरदार और उसके संवादों को दर्शकों ने खूब सराहा। संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के सहयोग से प्रस्तुत नाटक रांग नंबर के लेखक पाली भूपिंदर सिंह थे जबकि निर्देशन डा. ओमेन्द्र कुमार ने किया है। नाटक का कथानक व्हील चेयर पर अपनी जिंदगी गुजार रहे मानव (दीपक राज राही) से शुरू होता है। जिनका एक कार दुर्घटना में दोनों पैर निष्क्रिय हो चुका है। हालांकि उसकी पत्नी सत्या (दीपिका सिंह) उसका बहुत ख्याल रखती है लेकिन मानव बार बार अपनी पत्नी सत्या पर शक करता है। इस बीच मानव के पास एक कॉल आती है, जो कि एक रांग नंबर है। कॉल करने वाली कल्पना (संध्या सिंह) अपनी निजी जिंदगी की उदासियों से ऊब कर अनजान नंबर पर कॉल करती है। यह कॉल मानव के पास आता है और दोनों के बीच बातचीत शुरू हो जाती है। यह अनजान कॉल उसके जीवन में बदलाव लाती है और सत्या और मानव के बीच के उलझे रिश्ते धीरे धीरे सुलझने लगते हैं। कहानी के एक बेहतरीन अंत के साथ नाटक समाप्त होता है। इस मौके पर दो अन्य नाटकों इडिपस और पति, पत्नी और वो … का मंचन भी हुआ।

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