नई दिल्ली, 16 मई (वेब वार्ता)। देश में बढ़ती महंगाई और विदेशी निवेश में गिरावट के बीच केंद्र सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए बड़े कदम की तैयारी कर रहे हैं। खबर है कि सरकार विदहोल्डिंग टैक्स व्यवस्था में बदलाव करने या इसे पूरी तरह खत्म करने पर विचार कर रही है। यदि ऐसा होता है तो इसका सीधा फायदा विदेशी निवेशकों, कंपनियों, स्टार्टअप और आम करदाताओं को मिल सकता है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार पिछले कुछ सप्ताह से नीति निर्माताओं के बीच विदहोल्डिंग टैक्स को समाप्त करने को लेकर चर्चा चल रही है। सरकार और रिजर्व बैंक का मानना है कि टैक्स व्यवस्था को सरल बनाकर विदेशी निवेश को बढ़ावा दिया जा सकता है और बाजार में नकदी प्रवाह बढ़ाया जा सकता है।
सरकार की चिंता का मुख्य कारण विदेशी मुद्रा भंडार में लगातार गिरावट और विदेशी निवेशकों की बिकवाली मानी जा रही है। पिछले दो महीनों में देश के विदेशी मुद्रा भंडार में करीब 38 अरब डॉलर की कमी दर्ज की गई है। वहीं वर्ष 2026 में अब तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक भारतीय बाजारों से लगभग 22.5 अरब डॉलर निकाल चुके हैं।
इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता का असर भारतीय मुद्रा पर भी दिखाई दे रहा है। युद्ध शुरू होने के बाद से रुपया डॉलर के मुकाबले करीब पांच प्रतिशत कमजोर हुआ है। ऐसे में सरकार विदेशी पूंजी को देश में बनाए रखने और नए निवेश को आकर्षित करने के लिए विकल्प तलाश रही है।
क्या होता है विदहोल्डिंग टैक्स?
विदहोल्डिंग टैक्स वह कर होता है जिसे किसी व्यक्ति या संस्था को भुगतान करने से पहले ही काट लिया जाता है। उदाहरण के तौर पर बैंक ब्याज पर टीडीएस, विदेश से मिलने वाली आय पर टैक्स कटौती, डिविडेंड या रॉयल्टी भुगतान पर काटा जाने वाला टैक्स इसी श्रेणी में आता है। आसान शब्दों में कहें तो पैसा मिलने से पहले सरकार अपना हिस्सा काट लेती है।
सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था को आसान बनाने से कारोबार की लागत घटेगी और निवेशकों के हाथ में अधिक नकदी बचेगी। इससे कंपनियां विस्तार और नए निवेश पर ज्यादा ध्यान दे सकेंगी।
किसे मिलेगा फायदा?
यदि सरकार विदहोल्डिंग टैक्स में राहत देती है तो विदेशी निवेशकों के लिए भारत में निवेश करना अधिक आकर्षक हो सकता है। कंपनियों के पास तुरंत ज्यादा पूंजी उपलब्ध होगी, जिससे वे अपने कारोबार का विस्तार कर सकेंगी।
विदेश से भुगतान प्राप्त करने वाले सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र और स्टार्टअप कंपनियों को भी टैक्स कटौती से राहत मिलने की उम्मीद है। वहीं आम करदाताओं के लिए भी टैक्स रिफंड का इंतजार कम हो सकता है और बैंक ब्याज या डिविडेंड पर तुरंत कटने वाला टैक्स घट सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह फैसला लागू होता है तो इससे बाजार में निवेश गतिविधियां बढ़ सकती हैं और विदेशी मुद्रा भंडार को स्थिर रखने में मदद मिल सकती है।
हालांकि फिलहाल सरकार की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। सरकार और रिजर्व बैंक अभी इस प्रस्ताव के विभिन्न पहलुओं पर विचार कर रहे हैं। अंतिम निर्णय के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि किन क्षेत्रों और लोगों को इसका सबसे अधिक लाभ मिलेगा।




