नई दिल्ली, 11 मई (वेब वार्ता)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक आर्थिक संकट और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच देशवासियों से ईंधन बचाने, सार्वजनिक परिवहन का अधिक उपयोग करने और विदेशी मुद्रा संरक्षण में सहयोग देने की अपील की है। प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय केवल सरकार के प्रयासों का नहीं, बल्कि सामूहिक राष्ट्रीय जिम्मेदारी निभाने का है।
प्रधानमंत्री ने सामाजिक माध्यम पर साझा किए गए अपने संदेश में कहा कि पेट्रोल और डीजल की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय कीमतों के कारण देश पर विदेशी मुद्रा का अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। ऐसे समय में नागरिकों को निजी वाहनों के बजाय मेट्रो, बस और अन्य सार्वजनिक परिवहन साधनों का उपयोग करना चाहिए। उन्होंने जहां संभव हो वहां कार पूलिंग अपनाने और माल ढुलाई के लिए रेल परिवहन को प्राथमिकता देने की भी सलाह दी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना काल के दौरान अपनाई गई व्यवस्थाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि घर से काम, आनलाइन बैठकें और वीडियो संवाद जैसी व्यवस्थाओं को फिर से बढ़ावा देने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इन उपायों से ईंधन की बचत होगी, यातायात का दबाव कम होगा और राष्ट्रीय हित को मजबूती मिलेगी।
प्रधानमंत्री ने देशवासियों से अनावश्यक विदेश यात्राओं और विदेशी आयोजनों से बचने की भी अपील की। उन्होंने कहा कि नागरिक घरेलू पर्यटन को बढ़ावा दें और स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देकर देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करें। साथ ही एक वर्ष तक गैर जरूरी सोने की खरीदारी से बचने का सुझाव भी दिया ताकि विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम किया जा सके।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी प्रधानमंत्री की अपील का समर्थन करते हुए दिल्लीवासियों से मेट्रो और डीटीसी बसों के अधिक उपयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक परिवहन को अपनाने से ईंधन की बचत के साथ-साथ राजधानी में यातायात दबाव भी कम होगा। मुख्यमंत्री ने लोगों से कार पूलिंग को भी प्रोत्साहित करने का आग्रह किया।
प्रधानमंत्री की अपील के बाद सामाजिक माध्यमों पर भी व्यापक चर्चा देखने को मिली। कई लोगों ने घर से काम की व्यवस्था को वर्तमान परिस्थितियों में उपयोगी बताया। तकनीकी क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि इससे समय, ईंधन और मानसिक तनाव में कमी आ सकती है।
वहीं विपक्षी दलों ने सरकार की अपीलों को लेकर सवाल भी उठाए हैं। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इसे आर्थिक नीतियों की विफलता बताया, जबकि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि जनता पर लगातार त्याग का बोझ डाला जा रहा है। आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने भी सरकार की नीतियों की आलोचना की।
दूसरी ओर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने प्रधानमंत्री की अपील को दूरदर्शी बताते हुए कहा कि सीमित ईंधन उपयोग, घर से काम और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने जैसे कदम भारत को आत्मनिर्भर और ऊर्जा सुरक्षित राष्ट्र बनाने में सहायक सिद्ध होंगे।




