कानपुर, 10 मई (हरी शंकर शर्मा)। राष्ट्रीय एनआरपी दिवस के अवसर पर जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग की ओर से बेसिक नियोनेटल रिससिटेशन प्रोग्राम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य नवजात शिशुओं की मृत्यु दर में कमी लाना और जन्म के तुरंत बाद उत्पन्न होने वाली गंभीर परिस्थितियों से निपटने के लिए स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षित करना था।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में लगभग 150 स्वास्थ्य कर्मियों और प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इस दौरान नवजात शिशुओं के पुनर्जीवन से जुड़ी विभिन्न तकनीकों और आपातकालीन चिकित्सा प्रक्रियाओं का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को नवजात शिशुओं की प्रारंभिक देखभाल, श्वास संबंधी सहायता, बैग और मास्क वेंटिलेशन तथा बेसिक रिससिटेशन तकनीकों की जानकारी दी। प्रशिक्षण का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि जन्म के तुरंत बाद किसी भी जटिल स्थिति में स्वास्थ्य कर्मी प्रभावी तरीके से नवजात की जान बचा सकें।
बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. शैलेन्द्र कुमार गौतम ने कहा कि सही समय पर और सही तरीके से दिया गया एनआरपी प्रशिक्षण नवजात शिशुओं के जीवन को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को मजबूत करने और चिकित्सा कर्मियों की दक्षता बढ़ाने में सहायक होते हैं।
कार्यक्रम का संचालन कोर्स समन्वयक डॉ. यशवंत राव के नेतृत्व में किया गया। प्रशिक्षण सत्र में डॉ. दीवीना, डॉ. अमितेश यादव, डॉ. बिदिशा और डॉ. राहुल सहित अन्य विशेषज्ञ चिकित्सकों ने भी भाग लिया और प्रतिभागियों को विभिन्न चिकित्सा तकनीकों का अभ्यास कराया।
कार्यक्रम के समापन पर सभी प्रतिभागियों को भविष्य में नवजात शिशुओं की बेहतर देखभाल सुनिश्चित करने के लिए नियमित प्रशिक्षण और जागरूकता बनाए रखने का संदेश दिया गया। आयोजकों ने कहा कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम स्वास्थ्य क्षेत्र में बेहतर परिणाम लाने और नवजात मृत्यु दर कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।




