नई दिल्ली, 3 मई (वेब वार्ता)। Delhi Metro Rail Corporation (डीएमआरसी) ने मेट्रो स्टेशनों पर यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाने और विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है। अब प्लेटफॉर्म स्क्रीन डोर को स्वदेशी तकनीक से विकसित किया जाएगा, जिसके लिए भारतीय कंपनियों से अभिरुचि आमंत्रित की गई है।
स्वदेशी निर्माण को बढ़ावा
इस पहल के तहत हाफ हाइट और फुल हाइट प्लेटफॉर्म स्क्रीन डोर का डिजाइन, निर्माण और स्थापना देश में ही की जाएगी। परियोजना में कम से कम 75 प्रतिशत स्थानीय सामग्री का उपयोग अनिवार्य किया गया है, जिससे घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा और आयात पर निर्भरता घटेगी।
सुरक्षा में होगा बड़ा सुधार
प्लेटफॉर्म स्क्रीन डोर मेट्रो प्लेटफॉर्म और ट्रेन के बीच सुरक्षा अवरोध के रूप में कार्य करते हैं। ये दरवाजे ट्रेन के आगमन पर ही खुलते हैं, जिससे ट्रैक पर गिरने, दुर्घटनाओं और आत्महत्या जैसी घटनाओं की संभावना कम हो जाती है। साथ ही भीड़भाड़ के समय यात्रियों की आवाजाही नियंत्रित रहती है, जिससे संचालन अधिक सुरक्षित और सुव्यवस्थित होता है।
तकनीकी स्वायत्तता की दिशा में कदम
इस परियोजना के तहत विकसित तकनीक के बौद्धिक संपदा अधिकार और सॉफ्टवेयर के स्रोत कोड पर डीएमआरसी और चयनित कंपनी का संयुक्त अधिकार होगा। इससे भविष्य में देश इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा।
चयन प्रक्रिया के सख्त मानक
निजी एजेंसियों के चयन के लिए कड़े मानदंड तय किए गए हैं। केवल वही भारतीय कंपनियां आवेदन कर सकेंगी जिनके पास इस प्रणाली का कार्यशील नमूना मौजूद हो और जिनकी वित्तीय स्थिति मजबूत हो। आपराधिक या दिवालिया मामलों में शामिल कंपनियों को इस प्रक्रिया से बाहर रखा गया है।
परीक्षण और समयसीमा तय
नई तकनीक को मौजूदा सिग्नलिंग प्रणाली के साथ समन्वय में काम करना होगा, ताकि मेट्रो संचालन प्रभावित न हो। इच्छुक एजेंसियां 28 मई तक आवेदन कर सकती हैं। चयनित कंपनियों को एक कोच की लंबाई के बराबर प्लेटफॉर्म पर परीक्षण करना होगा। डिजाइन के लिए चार महीने और स्थापना व परीक्षण के लिए लगभग दो महीने का समय निर्धारित किया गया है।
यात्रियों को मिलेगा बेहतर अनुभव
इस पहल से न केवल यात्रियों की सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि मेट्रो सेवा भी अधिक भरोसेमंद और समयबद्ध बनेगी। स्वदेशी तकनीक के उपयोग से रखरखाव आसान और किफायती होगा, जिससे यात्रियों को बेहतर और सुरक्षित यात्रा का अनुभव मिल सकेगा। यह कदम देश को मेट्रो तकनीक के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।



