मक्का-मदीना रुबात विवाद: आरिफ मसूद ने सबा सुल्तान पर प्राथमिकी की चेतावनी दी

-अकबर खान

भोपाल, 29 अप्रैल (वेब वार्ता)। मक्का-मदीना स्थित रुबात व्यवस्था को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने इस मामले में सबा सुल्तान और सिकंदर हाफिज पर गंभीर आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराने की चेतावनी दी है।

विधायक मसूद ने मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष सनवर पटेल को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि भोपाल रियासत काल में हाजियों की सुविधा के लिए मक्का-मदीना में रुबात (धर्मशालाएं) बनवाई गई थीं, जहां उन्हें निःशुल्क ठहरने की व्यवस्था मिलती थी। लेकिन पिछले तीन से छह वर्षों के दौरान यह व्यवस्था लगभग ठप हो गई है, जिससे भोपाल, रायसेन और सीहोर के हाजियों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि कई बार बैठकों और आश्वासनों के बावजूद रुबात को पुनः संचालित करने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। मसूद के अनुसार, कुछ व्यक्तियों द्वारा वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में अनियमितताएं की गई हैं, जिसके कारण हाजियों को उनका अधिकार नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने दावा किया कि उनके पास इस संबंध में दस्तावेजी प्रमाण मौजूद हैं।

विधायक ने यह भी आशंका जताई कि मामले से जुड़े कुछ लोग देश छोड़ सकते हैं, इसलिए संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध शीघ्र कार्रवाई और पासपोर्ट जब्त करने जैसे कदम उठाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यदि वक्फ बोर्ड ने समय रहते कार्रवाई नहीं की तो वे स्वयं संबंधित लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराएंगे।

वहीं, वक्फ बोर्ड अध्यक्ष सनवर पटेल ने कहा कि शिकायत को गंभीरता से लिया गया है और सभी पक्षों से प्रमाण प्रस्तुत करने को कहा गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मदीना स्थित रुबात का मामला फिलहाल सऊदी अरब की अदालत में विचाराधीन है, जहां मुतवल्ली के अधिकार को लेकर विवाद चल रहा है। इसी कारण वर्तमान में इन संपत्तियों का रखरखाव स्थानीय वक्फ प्रशासन द्वारा किया जा रहा है।

पटेल ने बताया कि मक्का में भी प्रशासनिक और प्रक्रियागत समस्याएं सामने आई हैं, जिनके समाधान के लिए नोटिस जारी किए गए हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि सभी दस्तावेज मिलने के बाद मामले की निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी।

गौरतलब है कि रुबात व्यवस्था का उद्देश्य हज यात्रियों को पवित्र स्थलों पर सस्ती या निःशुल्क आवास सुविधा उपलब्ध कराना था। इस व्यवस्था के बाधित होने से हर वर्ष हजारों यात्रियों को निजी आवास का सहारा लेना पड़ता है, जिससे उनका खर्च बढ़ जाता है और कई श्रद्धालुओं के लिए हज यात्रा कठिन हो जाती है।

मामले के तूल पकड़ने के बाद अब यह केवल प्रशासनिक मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया है। आने वाले समय में जांच और संभावित कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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