गर्मी में मूंगफली की खेती: कम लागत, ज्यादा उत्पादन और बेहतर कमाई

नई दिल्ली, 04 अप्रैल (वेब वार्ता)। रबी सीजन की फसलों की कटाई के साथ ही किसानों के सामने अगली फसल के चयन की चुनौती खड़ी हो जाती है। ऐसे समय में मूंगफली की खेती किसानों के लिए एक लाभकारी विकल्प के रूप में तेजी से उभर रही है। कम लागत, आसान देखभाल और कम समय में तैयार होने वाली यह फसल छोटे और मध्यम वर्ग के किसानों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद साबित हो रही है।

गर्मी के मौसम में मूंगफली की खेती की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें अधिक मेहनत या बड़े निवेश की आवश्यकता नहीं होती। खेत की दो से तीन बार जुताई कर मिट्टी को भुरभुरी बना दिया जाए, तो बीज आसानी से अंकुरित हो जाते हैं। साथ ही सिंचाई की जरूरत भी सीमित होती है, क्योंकि यह फसल सामान्यतः 8 से 10 दिन के अंतराल पर पानी मांगती है।

गेहूं-चना कटाई के बाद बेहतर विकल्प

पहाड़ों से लेकर मैदानी क्षेत्रों तक गर्मी का असर बढ़ने के साथ ही गेहूं और चने की फसलें खेतों से निकलने लगी हैं। ऐसे में खेतों में मौजूद नमी मूंगफली की बुवाई के लिए अनुकूल मानी जाती है। यह फसल 90 से 110 दिनों में तैयार हो जाती है, जिससे किसान बरसात से पहले ही अच्छी पैदावार ले सकते हैं। कतारों में बुवाई करने से पौधों को पर्याप्त धूप और हवा मिलती है, जिससे रोगों का खतरा भी कम हो जाता है।

आर्थिक रूप से लाभकारी फसल

मूंगफली की खेती किसानों के लिए आर्थिक दृष्टि से भी काफी फायदेमंद है। बाजार में इसकी मांग पूरे वर्ष बनी रहती है और कीमतें भी सामान्यतः स्थिर रहती हैं। एक बीघा भूमि में औसतन 6 से 8 क्विंटल तक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है, जिससे किसानों को अच्छा लाभ मिलता है। इसके अलावा, इसके पौधों का अवशेष पशुओं के लिए पौष्टिक चारे के रूप में उपयोग किया जाता है, जिससे पशुपालकों को अतिरिक्त लाभ मिलता है।

उर्वरकों के संतुलित उपयोग से बढ़ती पैदावार

खेती के दौरान उचित मात्रा में खाद और उर्वरकों का प्रयोग उत्पादन बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, खेत में 5 से 7 टन गोबर खाद के साथ जिप्सम और आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्वों का उपयोग करने से फसल अधिक दानेदार और बेहतर गुणवत्ता वाली होती है। मूंगफली में कीटों का प्रकोप भी अपेक्षाकृत कम होता है, जिससे कीटनाशकों पर अतिरिक्त खर्च नहीं करना पड़ता। किसान जैविक तरीकों से भी इसकी अच्छी उपज प्राप्त कर सकते हैं।

मिट्टी की उर्वरा शक्ति में भी होता है सुधार

मूंगफली की जड़ें मिट्टी में नाइट्रोजन स्थिर करने का कार्य करती हैं, जिससे भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ती है। इसका सीधा लाभ अगली फसल को मिलता है। यही कारण है कि कृषि विशेषज्ञ भी किसानों को गर्मी के मौसम में मूंगफली की खेती अपनाने की सलाह दे रहे हैं। कुल मिलाकर, गेहूं और चने की कटाई के बाद मूंगफली की खेती किसानों के लिए कम लागत में अधिक लाभ देने वाला विकल्प साबित हो रही है। बदलते मौसम और आर्थिक चुनौतियों के बीच यह फसल किसानों को स्थिर आय का मजबूत आधार प्रदान कर रही है।

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