Gold, Silver Crash 2026 : इस बार बुलियन मार्केट में कुछ अलग ट्रेंड देखने को मिल रहा है। जियो पॉलिटिकल टेंशन लगातार बढ़ रही है, साथ ही में सोने और चांदी में गिरावट भी। ईरान संकट ने जहां दुनिया भर के इक्विटी बाजारों को हिलाकर रख दिया है, वहीं बुलियन मार्केट में भी तेज गिरावट है। हाल यह है कि 27 जनवरी को हाई बनाने के बाद सोना 25 फीसदी और चांदी 50 फीसदी टूट चुकी है।
27 जनवरी के पहले जो तेजी रुकने का नाम नहीं ले रही थी, वह अब सबसे तेज गिरावट में बदल गई है। सिर्फ 53 दिनों में ही सोना और चांदी अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा गंवा चुके हैं। अब निवेशकों के मन में सवाल उठ सकता है कि यह खतरे का संकेत है या फिर खरीदारी का परफेक्ट समय।
27 जनवरी के बाद बदले हालात
27 जनवरी 2026 को MCX पर चांदी, 4,20,048 रुपये प्रति किला के ऑल-टाइम हाई तक पहुंच गई थी, जो अब गिरकर करीब 2,06,360 रुपये पर आ गई है। यानी इसमें करीब 50% की बड़ी गिरावट आई है। सोना भी इस दौरान 1,80,779 रुपये से गिरकर करीब 1,35,800 रुपये तक आ गया। यह गिरावट सिर्फ एक बाजार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरी दुनिया में बन रहे रिस्क-ऑफ माहौल को दिखाती है, जहां निवेशक तेजी से अलग-अलग एसेट्स से पैसा निकाल रहे हैं।
सोने आर चांदी में क्यों आ रही गिरावट
केडिया एडवाइजरी की रिपोर्ट के मुताबिक सोने और चांदी में यह गिरावट दुनियाभर के बाजारों में हो रही भारी बिकवाली की वजह से आई है, जिसमें दुबई का रियल एस्टेट, क्रिप्टोकरेंसी और शेयर बाजार भी शामिल हैं। वहीं, अमेरिका के फेडरल रिजर्व के सख्त रुख ने भी दबाव बढ़ा दिया है, क्योंकि यूएस फेड ने 2026 में दरें बढ़ाने के संकेत दिए हैं।
डॉलर इंडेक्स भी लगातार मजबूत हो रहा है, जिसके चलते सोना और चांदी का आकर्षण कम हुआ है। वहीं, ETF में निवेश घट रहा है और निवेशक पैसा बाहर निकाल रहे हैं, जिससे कीमतों पर और दबाव पड़ा है। इसके अलावा, दुनिया भर में बढ़ते जियो पॉलिटिकल टेंशन ने अनिश्चितता को और बढ़ा दिया है।
क्या अभी बढ़ेगी गिरावट
केडिया एडवाइजरी की रिपोर्ट के मुताबिक आगे की बात करें तो विशेषज्ञों का मानना है कि अभी थोड़े समय तक गिरावट जारी रह सकती है। सोना 1,15,000 रुपये तक नीचे आ सकता है और चांदी MCX पर करीब 1,75,000 रुपये तक कमजोर हो सकती है।
हालांकि, सोने और चांदी की हिस्ट्री देखें तो पता चलता है कि जंग या इस तरह के तनाव के कारण आई गिरावट के बाद बाद में कीमतों में फिर से तेजी देखने को मिलती है। ऐसे में यह गिरावट लंबे समय के निवेशकों और ज्वेलरी खरीदने वालों के लिए अच्छा मौका बन सकती है, खासकर अगर आने वाले महीनों में कीमतें स्थिर हो जाती हैं।







