मिडिल ईस्ट जंग पर अमेरिकी पूर्व अधिकारी का बड़ा दावा, बोले- इजरायल ने बढ़ाया तनाव

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वॉशिंगटन/डेस्क | वेब वार्ता

मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के बीच अमेरिका के पूर्व अधिकारी जो केंट ने बड़ा बयान देकर विवाद खड़ा कर दिया है। नेशनल काउंटरटेररिज्म सेंटर के पूर्व निदेशक रहे केंट ने दावा किया कि इस संघर्ष को बढ़ाने में इजरायल की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि उस समय ईरान परमाणु हथियार बनाने के करीब नहीं था और हालात को जिस दिशा में मोड़ा गया, उससे टकराव बढ़ना तय था।

इजरायल के कदमों से बिगड़े हालात: जो केंट

एक इंटरव्यू में जो केंट ने कहा कि इजरायल ने ऐसे फैसले लिए, जिनसे क्षेत्र में तनाव बढ़ा और ईरान की ओर से जवाबी कार्रवाई होना लगभग तय था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इजरायल को विश्वास था कि अंततः अमेरिका को उसका समर्थन करना ही पड़ेगा।

ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अलग राय

मुद्दाकेंट का दावा
परमाणु हथियार खतरातत्काल कोई खतरा नहीं
ट्रंप का दावाकुछ हफ्तों में हथियार संभव
धार्मिक आदेश (फतवा)2004 से लागू, हथियार पर रोक

केंट ने डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे को भी खारिज किया, जिसमें कहा गया था कि ईरान कुछ ही हफ्तों में परमाणु हथियार बना सकता है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी एजेंसियों के पास ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं था, जिससे यह साबित हो कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा था।

  • ईरान पर तत्काल परमाणु खतरे का आरोप खारिज
  • इजरायल की रणनीति पर सवाल
  • अमेरिका की भूमिका पर भी चर्चा

अली खामेनेई को लेकर भी टिप्पणी

जो केंट ने ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई को लेकर भी बयान दिया। उन्होंने कहा कि उनकी मौत से अमेरिका को कोई रणनीतिक लाभ नहीं मिला, बल्कि इससे ईरान के कट्टरपंथी तत्व और मजबूत हो गए हैं।

व्हाइट हाउस ने आरोपों को किया खारिज

व्हाइट हाउस ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति अपने फैसले स्वतंत्र रूप से लेते हैं और किसी भी अन्य देश के दबाव में काम नहीं करते। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि मिडिल ईस्ट में उठाए गए सभी कदम अमेरिका के रणनीतिक हितों को ध्यान में रखकर लिए गए हैं।

निष्कर्ष

मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के बीच इस तरह के बयान अंतरराष्ट्रीय राजनीति को और जटिल बना सकते हैं। जो केंट के दावों और व्हाइट हाउस के खंडन के बीच सच्चाई क्या है, यह आने वाले समय में और स्पष्ट हो सकेगा, लेकिन फिलहाल यह विवाद वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है।


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