देहरादून, राज्य डेस्क | वेब वार्ता
Dharma Guardian Joint Military Exercise का सातवां संस्करण उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के चौबटिया में 24 फरवरी से 08 मार्च 2026 तक आयोजित किया गया। भारत और जापान की सेनाओं के बीच आयोजित यह संयुक्त सैन्य अभ्यास दोनों देशों के बढ़ते रक्षा सहयोग का महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है। Dharma Guardian Joint Military Exercise के माध्यम से दोनों देशों की सेनाओं ने आतंकवाद और उभरती सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए साझा रणनीतियों पर प्रशिक्षण लिया।
- अभ्यास: Dharma Guardian Joint Military Exercise
- स्थान: चौबटिया, जिला अल्मोड़ा
- अवधि: 24 फरवरी से 08 मार्च 2026
- भागीदारी: भारत और जापान की सेनाएं
- मुख्य उद्देश्य: आतंकवाद विरोधी और संयुक्त युद्ध प्रशिक्षण
भारत-जापान रक्षा सहयोग का महत्वपूर्ण हिस्सा
Dharma Guardian Joint Military Exercise भारत और जापान के बीच रक्षा सहयोग को मजबूत करने के लिए आयोजित किया जाता है। वर्ष 2018 से यह अभ्यास दोनों देशों में बारी-बारी से आयोजित किया जा रहा है।
इस अभ्यास के माध्यम से दोनों देशों की सेनाएं साझा सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए अपने अनुभव और रणनीतियों का आदान-प्रदान करती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इस प्रकार के संयुक्त सैन्य अभ्यास क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
आतंकवाद विरोधी अभियानों पर विशेष प्रशिक्षण
Dharma Guardian Joint Military Exercise के दौरान दोनों देशों के सैनिकों ने काउंटर इंसर्जेंसी और काउंटर टेररिज्म ऑपरेशन से संबंधित प्रशिक्षण प्राप्त किया। इसके अलावा शहरी युद्ध कौशल और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में अभियान चलाने की रणनीतियों पर भी अभ्यास किया गया।
इस प्रशिक्षण का उद्देश्य दोनों सेनाओं की संयुक्त अभियान क्षमता को मजबूत बनाना और जटिल परिस्थितियों में बेहतर समन्वय स्थापित करना था।
- काउंटर इंसर्जेंसी ऑपरेशन का प्रशिक्षण
- काउंटर टेररिज्म अभ्यास
- शहरी युद्ध कौशल का अभ्यास
- जटिल भूभाग में संयुक्त सैन्य रणनीति
सामरिक संबंधों को मिला नया आयाम
Dharma Guardian Joint Military Exercise ने भारत और जापान के बीच गहराते सामरिक संबंधों को और मजबूत किया है। इस अभ्यास ने क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और उन्नत रक्षा सहयोग के प्रति दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता को पुनः स्थापित किया।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के सैन्य अभ्यास भविष्य में दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाएंगे।
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