Kushinagar International Airport: 327 करोड़ खर्च के बाद भी उड़ानें बंद, मेंटेनेंस खर्च 152% बढ़ा

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कुशीनगर, ममता तिवारी | वेब वार्ता

Kushinagar International Airport: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने के उद्देश्य से बनाए गए कुशीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट की स्थिति फिलहाल चिंताजनक बनी हुई है। लगभग 327.30 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित इस अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट से वर्तमान में कोई भी नियमित उड़ान संचालित नहीं हो रही है। अक्टूबर 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उद्घाटन के बाद जिस एयरपोर्ट को क्षेत्र के विकास और पर्यटन के नए द्वार के रूप में देखा गया था, वह आज उड़ानों के अभाव में लगभग वीरान पड़ा है।

स्थिति यह है कि जहां एक ओर Kushinagar International Airport से उड़ानों का संचालन शून्य हो गया है, वहीं दूसरी ओर इसके रखरखाव पर होने वाला खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है। बीते चार वर्षों में एयरपोर्ट का मेंटेनेंस खर्च लगभग 152 प्रतिशत तक बढ़ गया है।

⚡ संक्षिप्त वार्ता (News Summary)

  • 327 करोड़ रुपये की लागत से बना Kushinagar International Airport
  • 2023 के बाद से एयरपोर्ट से नियमित उड़ानें पूरी तरह बंद
  • चार वर्षों में मेंटेनेंस खर्च 152 प्रतिशत बढ़ा
  • मार्च या अप्रैल से दिल्ली के लिए उड़ान शुरू होने की संभावना

Kushinagar International Airport से उड़ानें क्यों बंद हुईं

Kushinagar International Airport का उद्घाटन अक्टूबर 2021 में किया गया था। उस समय उम्मीद जताई गई थी कि यह एयरपोर्ट बौद्ध पर्यटन को बढ़ावा देगा और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कुशीनगर को एक प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करेगा। इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ने और क्षेत्रीय विकास को गति मिलने की भी संभावना जताई गई थी।

शुरुआती समय में घरेलू उड़ानों के रूप में दिल्ली से कुशीनगर के लिए सीमित हवाई सेवा शुरू हुई। स्पाइसजेट द्वारा संचालित यह सेवा चार नवंबर 2023 तक जारी रही। इसके बाद बिना किसी स्पष्ट कारण के यह एकमात्र उड़ान सेवा भी बंद हो गई। परिणामस्वरूप आज Kushinagar International Airport से कोई भी नियमित उड़ान संचालित नहीं हो रही है।

📌 कुशीनगर एयरपोर्ट से जुड़ी प्रमुख बातें

  • अक्टूबर 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया उद्घाटन
  • निर्माण लागत लगभग 327.30 करोड़ रुपये
  • 2023 के बाद से नियमित उड़ानें पूरी तरह बंद
  • बौद्ध पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बनाया गया एयरपोर्ट

मेंटेनेंस खर्च में लगातार हो रही बढ़ोतरी

एक ओर जहां Kushinagar International Airport से उड़ानों का संचालन बंद है, वहीं दूसरी ओर एयरपोर्ट के रखरखाव पर होने वाला खर्च लगातार बढ़ रहा है। एयरपोर्ट के संचालन और रखरखाव के लिए हर वर्ष करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं।

वित्तीय वर्षमेंटेनेंस खर्च
2021–22135.83 लाख रुपये
2022–23221.98 लाख रुपये
2023–24305.22 लाख रुपये
2024–25342 लाख रुपये

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि Kushinagar International Airport का मेंटेनेंस खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है, जबकि एयरपोर्ट से उड़ानों का संचालन लगभग ठप पड़ा है।

पर्यटन और विकास की उम्मीदों को लगा झटका

कुशीनगर बौद्ध धर्म से जुड़े विश्व के प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक है। यहां भगवान बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली स्थित है, जिसके कारण हर वर्ष बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक यहां आते हैं। Kushinagar International Airport का निर्माण इसी उद्देश्य से किया गया था कि अंतरराष्ट्रीय पर्यटक सीधे कुशीनगर पहुंच सकें और क्षेत्र में पर्यटन उद्योग को बढ़ावा मिले।

हालांकि, एयरपोर्ट के संचालन में अनियमितता और उड़ानों की कमी के कारण पर्यटन को अपेक्षित लाभ नहीं मिल सका। स्थानीय लोगों और व्यापारियों का कहना है कि यदि नियमित उड़ानें शुरू होतीं तो होटल, परिवहन और पर्यटन से जुड़े व्यवसायों को काफी लाभ मिलता।

🔎 अब आगे क्या होगा?

  • मार्च अंत या अप्रैल से दिल्ली के लिए उड़ान शुरू होने की संभावना
  • एयर इंडिया एक्सप्रेस के साथ वार्ता जारी
  • UDAN योजना के तहत अन्य शहरों से कनेक्टिविटी की योजना
  • पर्यटन बढ़ाने के लिए एयरपोर्ट को सक्रिय करने की तैयारी

नई उड़ानों को लेकर फिर जगी उम्मीद

Kushinagar International Airport से उड़ानों के संचालन को लेकर एक बार फिर उम्मीदें जगी हैं। एयरपोर्ट निदेशक प्रणेश राय के अनुसार समर शेड्यूल यानी मार्च के अंत या अप्रैल से दिल्ली के लिए हवाई सेवा शुरू होने की संभावना है। उन्होंने बताया कि एक विमानन कंपनी से इस संबंध में वार्ता की जा चुकी है और उड़ान संचालन के लिए आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।

इसके अलावा उड़ान योजना के तहत कुशीनगर को आगरा, बरेली, गया और कानपुर से जोड़ने की भी योजना बनाई गई थी। इसके लिए लेटर ऑफ इंटेंट जारी किया गया था, लेकिन अब तक किसी विमानन कंपनी ने इस रूट पर उड़ान शुरू करने में रुचि नहीं दिखाई है।

ऐसे में अब स्थानीय लोगों और प्रशासन की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या आने वाले महीनों में Kushinagar International Airport से फिर से नियमित उड़ानें शुरू हो पाएंगी और क्या यह एयरपोर्ट वास्तव में क्षेत्रीय विकास और पर्यटन के नए अवसर पैदा कर सकेगा।

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