Deoria One Stop Centre Inspection: पीड़िताओं की सुरक्षा और अधिकारों के संरक्षण पर जोर, सिविल जज शैलजा मिश्रा का औचक निरीक्षण

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देवरिया, राज्य डेस्क | वेब वार्ता

Deoria One Stop Centre Inspection: उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में पीड़ित महिलाओं की सुरक्षा और उनके अधिकारों के संरक्षण को लेकर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने महत्वपूर्ण पहल की है। रविवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव एवं सिविल जज (सीनियर डिवीजन) शैलजा मिश्रा ने वन स्टॉप सेंटर का औचक निरीक्षण किया और वहां उपलब्ध सुविधाओं, सुरक्षा व्यवस्था तथा पीड़ित महिलाओं को दी जा रही सेवाओं की समीक्षा की। निरीक्षण के दौरान उन्होंने स्पष्ट कहा कि पीड़िताओं की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा समाज और प्रशासन दोनों की जिम्मेदारी है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

निरीक्षण के दौरान सचिव ने सेंटर में रह रही महिलाओं से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं और सुविधाओं की जानकारी ली। उन्होंने भोजन, पेयजल, स्वच्छता, सुरक्षा और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं के बारे में विस्तार से पूछताछ की और यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि पीड़ित महिलाओं को सभी बुनियादी सुविधाएं समय पर और गुणवत्तापूर्ण तरीके से उपलब्ध कराई जाएं।

⚡ संक्षिप्त वार्ता (News Summary)

  • देवरिया के वन स्टॉप सेंटर का सिविल जज शैलजा मिश्रा ने किया औचक निरीक्षण
  • पीड़ित महिलाओं की सुरक्षा और अधिकारों के संरक्षण पर दिया विशेष जोर
  • भोजन, पानी, स्वच्छता और अन्य सुविधाओं की जानकारी ली
  • सुरक्षा व्यवस्था में पाई गई कमी पर अधिकारियों को दिए निर्देश

पीड़िताओं की सुरक्षा को लेकर दिए सख्त निर्देश

निरीक्षण के दौरान सचिव शैलजा मिश्रा ने स्पष्ट कहा कि वन स्टॉप सेंटर का मुख्य उद्देश्य संकटग्रस्त महिलाओं को तत्काल सहायता और सुरक्षा प्रदान करना है। ऐसे में यहां रहने वाली पीड़िताओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज को भी महिलाओं की सुरक्षा और उनके अधिकारों के प्रति जागरूक और संवेदनशील रहना चाहिए।

उन्होंने केंद्र में मौजूद चार संवासिनियों से व्यक्तिगत रूप से बातचीत कर उनके अनुभवों और आवश्यकताओं को समझने का प्रयास किया। इस दौरान उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया कि पीड़ित महिलाओं को सुरक्षित वातावरण, उचित भोजन, स्वच्छ पेयजल और स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं या नहीं।

📌 क्या है वन स्टॉप सेंटर की भूमिका?

  • हिंसा या उत्पीड़न की शिकार महिलाओं को तत्काल सहायता प्रदान करना
  • कानूनी, मनोवैज्ञानिक और चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराना
  • सुरक्षित अस्थायी आवास और परामर्श की सुविधा देना
  • महिलाओं को उनके अधिकारों और कानूनी विकल्पों की जानकारी देना

रजिस्टर और अभिलेखों का भी किया निरीक्षण

सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने निरीक्षण के दौरान केंद्र के विभिन्न रजिस्टरों और अभिलेखों की भी जांच की। उन्होंने कार्मिक उपस्थिति रजिस्टर, स्टॉक रजिस्टर और अन्य आवश्यक दस्तावेजों को देखा तथा उन्हें व्यवस्थित रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसी भी सरकारी संस्था के सुचारू संचालन के लिए अभिलेखों का सही और अद्यतन होना अत्यंत आवश्यक है।

निरीक्षण के दौरान कुछ व्यवस्थाओं में कमी भी पाई गई, जिस पर सचिव ने केंद्र की प्रबंधक नीतु भारती को कड़े निर्देश दिए। उन्होंने विशेष रूप से सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्कता बरतने और संबंधित सुरक्षा प्रभारी के साथ समन्वय स्थापित कर व्यवस्थाओं को मजबूत करने के लिए कहा।

महिलाओं को विधिक सहायता उपलब्ध कराने पर जोर

सचिव शैलजा मिश्रा ने कहा कि कई बार पीड़ित महिलाएं अपने अधिकारों और कानूनी विकल्पों से अनजान रहती हैं। ऐसे में वन स्टॉप सेंटर की जिम्मेदारी है कि वह जरूरतमंद महिलाओं को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से जोड़कर उन्हें मुफ्त विधिक सहायता उपलब्ध कराए।

उन्होंने निर्देश दिया कि जिन महिलाओं को कानूनी सहायता की आवश्यकता है, उनके मामलों को चिन्हित कर अधिक से अधिक संख्या में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, देवरिया के कार्यालय में संदर्भित किया जाए ताकि उन्हें समय पर न्यायिक सहायता मिल सके।

📊 निरीक्षण से जुड़े प्रमुख बिंदु

  • वन स्टॉप सेंटर में रह रही चार महिलाओं से की गई बातचीत
  • भोजन, पानी और स्वच्छता की व्यवस्था का लिया गया जायजा
  • सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के दिए निर्देश
  • जरूरतमंद महिलाओं को विधिक सहायता से जोड़ने पर जोर

महिला सुरक्षा के प्रति प्रशासन की प्रतिबद्धता

देवरिया में हुए इस निरीक्षण को महिला सुरक्षा और अधिकारों की दिशा में प्रशासन की गंभीरता के रूप में देखा जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि वन स्टॉप सेंटर महिलाओं को संकट की स्थिति में तत्काल सहायता प्रदान करने के लिए महत्वपूर्ण संस्थान है और इसकी कार्यप्रणाली को प्रभावी बनाना आवश्यक है।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण का उद्देश्य केवल कानूनी सहायता उपलब्ध कराना ही नहीं बल्कि महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक बनाना भी है। अधिकारियों का मानना है कि प्रशासन और समाज के संयुक्त प्रयासों से ही महिलाओं के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण सुनिश्चित किया जा सकता है।

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