देवरिया, ममता तिवारी | वेब वार्ता
Deoria Financial Fraud: उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में माइक्रोफाइनेंस संस्था भारत फाइनेंशियल इंक्लूजन लिमिटेड की पथरदेवा शाखा में करीब 21 लाख रुपये के गबन का मामला सामने आया है। आरोप है कि शाखा के ब्रांच मैनेजर समेत आठ कर्मचारियों ने महिलाओं से वसूली गई ऋण की किस्तों की रकम कंपनी खाते में जमा करने के बजाय अपने पास रख ली और बाद में फरार हो गए। एरिया मैनेजर की तहरीर पर पुलिस ने सभी आरोपितों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
बताया जा रहा है कि यह शाखा इंडसइंड बैंक के पूर्ण स्वामित्व वाली माइक्रोफाइनेंस कंपनी भारत फाइनेंशियल इंक्लूजन लिमिटेड के अंतर्गत संचालित होती है। इस संस्था के माध्यम से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की जरूरतमंद महिलाओं को आसान केवाईसी प्रक्रिया के आधार पर छोटे ऋण दिए जाते हैं, जिनकी साप्ताहिक किस्तें फील्ड स्टाफ द्वारा वसूली जाती हैं। इसी प्रक्रिया में कथित रूप से बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता सामने आई है।
- Deoria Financial Fraud: देवरिया के पथरदेवा में भारत फाइनेंशियल शाखा में 21 लाख रुपये गबन का मामला
- ब्रांच मैनेजर समेत कुल 8 कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज
- महिलाओं से वसूली गई साप्ताहिक किस्त की रकम जमा नहीं की गई
- पुलिस ने जांच शुरू कर आरोपितों की गिरफ्तारी की तैयारी तेज की
कैसे सामने आया Deoria Financial Fraud का मामला
पुलिस के अनुसार तरकुलवा क्षेत्र निवासी विपिन कुमार शर्मा, जो भारत फाइनेंशियल इंक्लूजन लिमिटेड में एरिया मैनेजर के पद पर कार्यरत हैं, ने इस पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने अपनी तहरीर में बताया कि पथरदेवा शाखा के माध्यम से बड़ी संख्या में महिलाओं को छोटे ऋण दिए गए थे, जिनकी साप्ताहिक किस्तों की वसूली शाखा के फील्ड कर्मचारी करते थे।
कुछ दिनों पहले शाखा के कई कर्मचारियों ने अचानक कार्यालय आना बंद कर दिया, जिससे कंपनी प्रबंधन को संदेह हुआ। जब एरिया मैनेजर ने मामले की जांच शुरू की तो पता चला कि कई महिलाओं से किस्त की रकम पहले ही वसूली जा चुकी है, लेकिन वह राशि कंपनी खाते में जमा नहीं की गई थी। इससे करीब 21 लाख रुपये के गबन की आशंका सामने आई।
Deoria Financial Fraud: महिलाओं से वसूली गई रकम नहीं की गई जमा
एरिया मैनेजर ने अन्य कर्मचारियों के साथ क्षेत्र में जाकर महिलाओं से संपर्क किया और उनसे ऋण की किस्तों के बारे में जानकारी ली। महिलाओं ने बताया कि उन्होंने अपनी साप्ताहिक किस्तें पहले ही फील्ड कर्मचारियों को दे दी थीं। जब इस रकम का रिकॉर्ड शाखा में नहीं मिला तो स्पष्ट हुआ कि वसूली की रकम जमा ही नहीं की गई।
इसके बाद जब शिकायतकर्ता संबंधित कर्मचारियों के घर पहुंचे और इस बारे में पूछताछ की तो आरोप है कि उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया और उन्हें वहां से भगा दिया गया। इससे मामला और गंभीर हो गया।
- माइक्रोफाइनेंस शाखा के माध्यम से महिलाओं को छोटे ऋण दिए जाते थे
- फील्ड स्टाफ साप्ताहिक किस्त की वसूली करता था
- वसूली की रकम कंपनी खाते में जमा करने के बजाय कर्मचारियों ने अपने पास रख ली
- करीब 21 लाख रुपये की वित्तीय गड़बड़ी सामने आई
पुलिस ने आठ आरोपितों पर दर्ज किया मुकदमा
Deoria Financial Fraud: एरिया मैनेजर की शिकायत पर पुलिस अधीक्षक के निर्देश के बाद तरकुलवा थाना पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए ब्रांच मैनेजर शैलेश कुमार समेत कुल आठ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। जिन कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ है उनमें उपेंद्र यादव, साबिर अली, अमरिंदर, शिव कुमार सिंह, हिमांशु, प्रशांत किशोर और सन्नी यादव के नाम शामिल हैं।
पुलिस का कहना है कि सभी आरोपितों के खिलाफ गंभीर धाराओं में केस दर्ज कर लिया गया है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है। शुरुआती जांच में वित्तीय अनियमितता के कई पहलुओं की जांच की जा रही है।
माइक्रोफाइनेंस संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
देवरिया में सामने आए इस Deoria Financial Fraud मामले के बाद माइक्रोफाइनेंस संस्थाओं की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में चलने वाली माइक्रोफाइनेंस योजनाओं में बड़ी संख्या में महिलाओं को छोटे ऋण दिए जाते हैं, जिनकी वसूली फील्ड कर्मचारियों के माध्यम से होती है। ऐसे में यदि निगरानी मजबूत न हो तो वित्तीय अनियमितताओं की आशंका बढ़ जाती है।
हालांकि कंपनी प्रबंधन का कहना है कि इस मामले में जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और प्रभावित ग्राहकों के हितों की पूरी तरह रक्षा की जाएगी।
जल्द हो सकती है आरोपितों की गिरफ्तारी
इस मामले में तरकुलवा थाना प्रभारी भूपेंद्र सिंह ने बताया कि एरिया मैनेजर की तहरीर के आधार पर कुल आठ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और जल्द ही आरोपितों की गिरफ्तारी की जाएगी।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान यदि किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस टीम आरोपित कर्मचारियों की तलाश में जुटी हुई है।







