Madhoganj Shankaracharya Speech: गोमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा देने की मांग, 11 मार्च को लखनऊ में ‘धर्मयुद्ध शंखनाद’ का ऐलान

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हरदोई, लक्ष्मीकांत पाठक | वेब वार्ता

Madhoganj Shankaracharya Speech: उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के माधोगंज क्षेत्र में सोमवार को ज्योतिषपीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का आगमन हुआ। वे ‘गो प्रतिष्ठा–धर्मयुद्ध शंखनाद’ अभियान के तहत वाराणसी से लखनऊ तक यात्रा कर रहे हैं। इस अभियान का उद्देश्य समाज को जागरूक करते हुए गोमाता को राज्य माता और राष्ट्रमाता का सम्मान दिलाने की मांग को मजबूत स्वर देना है। अपने उद्बोधन में शंकराचार्य ने कहा कि यदि यह मांग पूरी नहीं हुई तो 11 मार्च को लखनऊ में ‘धर्मयुद्ध शंखनाद’ किया जाएगा, जो पूरी तरह वैचारिक संघर्ष के रूप में आयोजित होगा।

⚡ संक्षिप्त वार्ता (News Summary)

  • माधोगंज में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का उद्बोधन
  • गोमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा देने की उठाई मांग
  • 11 मार्च को लखनऊ में ‘धर्मयुद्ध शंखनाद’ का ऐलान
  • गौसंरक्षण और सांस्कृतिक मूल्यों पर दिया जोर

Madhoganj Shankaracharya Speech: गोसंरक्षण को लेकर उठाई आवाज

माधोगंज में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं में गौवंश का विशेष महत्व रहा है। उन्होंने कहा कि गोमाता केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का भी महत्वपूर्ण आधार है।

उन्होंने समाज से आह्वान किया कि गोसंरक्षण के लिए जागरूकता बढ़ाई जाए और सरकार से गोमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा देने की मांग को मजबूत किया जाए।

Madhoganj Shankaracharya Speech: शंकराचार्य ने कहा कि यदि गोमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा नहीं दिया गया तो 11 मार्च को लखनऊ में ‘धर्मयुद्ध शंखनाद’ किया जाएगा।

भारतभूमि को बताया ज्ञान और संस्कृति की भूमि

अपने उद्बोधन में उन्होंने भारतभूमि को ज्ञान, संस्कृति और धर्म की पुण्यस्थली बताते हुए कहा कि इस देश की सभ्यता और परंपराएं विश्व में अद्वितीय हैं। उन्होंने कहा कि भारत में प्रत्येक व्यक्ति अपने कर्मों के आधार पर पुण्य और पाप अर्जित करता है और यही इस भूमि की आध्यात्मिक विशेषता है।

उन्होंने हरदोई की पौराणिक महत्ता का भी उल्लेख किया और कहा कि यह क्षेत्र हिरण्यकश्यप की भूमि के रूप में भी जाना जाता है। भागवत कथा में इस क्षेत्र का उल्लेख मिलता है, जिससे इसकी ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता स्पष्ट होती है।

📊 अभियान की प्रमुख बातें

  • वाराणसी से लखनऊ तक ‘गो प्रतिष्ठा–धर्मयुद्ध शंखनाद’ यात्रा
  • गोमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा देने की मांग
  • समाज में गोसंरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास
  • 11 मार्च को लखनऊ में प्रस्तावित वैचारिक आंदोलन

गौवंश की घटती संख्या पर जताई चिंता

शंकराचार्य ने गौसंरक्षण के विषय पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि हालिया पशुधन गणना के अनुसार देश में गौवंश की संख्या में लगभग 15 से 20 लाख तक की कमी आई है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति चिंता का विषय है और समाज तथा सरकार दोनों को इस दिशा में गंभीरता से कदम उठाने की आवश्यकता है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एक ओर जहां गौवंश की संख्या में कमी आ रही है, वहीं दूसरी ओर गोहत्या से जुड़ी कंपनियों से राजनीतिक चंदा लेने की चर्चाएं भी सामने आती रही हैं। उनके अनुसार, यह स्थिति देश की सांस्कृतिक भावनाओं के विपरीत है।

विवादित टिप्पणी पर भी जताई प्रतिक्रिया

अपने संबोधन के दौरान शंकराचार्य ने बिहार के एक मौलाना द्वारा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की माता के संबंध में दिए गए कथित विवादित बयान पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति की माता के प्रति अपमानजनक टिप्पणी करना पूरी तरह अनुचित और निंदनीय है।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक मां हमारे लिए समान रूप से आदरणीय है और उनके सम्मान की रक्षा करना समाज का दायित्व है। इस प्रकार की टिप्पणियां सामाजिक सौहार्द और मर्यादा के विरुद्ध हैं।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में संतजन, श्रद्धालु और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। लोगों ने शंकराचार्य के विचारों को ध्यानपूर्वक सुना और गोसंरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर सहमति जताई।

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