हरदोई, लक्ष्मीकान्त पाठक | वेब वार्ता
Kachhauna Superstition Issue: सूचना क्रांति के दौर में जहां दुनिया विज्ञान और तकनीक की नई ऊँचाइयों को छू रही है, वहीं उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के कछौना क्षेत्र में अंधविश्वास का जाल तेजी से फैलता नजर आ रहा है। एक ओर भारत अंतरिक्ष अनुसंधान और तकनीकी विकास में नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण इलाकों में झाड़-फूंक, तंत्र-मंत्र और कथित ‘ढोंगी बाबाओं’ के नाम पर लोगों की आस्था का खुलेआम शोषण किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन की नजरों के सामने यह ‘काला कारोबार’ फल-फूल रहा है, लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
⚡ संक्षिप्त वार्ता (News Summary)
- हरदोई के कछौना क्षेत्र में अंधविश्वास और झाड़-फूंक का जाल फैलने का आरोप
- कथित बाबाओं द्वारा तंत्र-मंत्र के नाम पर ग्रामीणों से ठगी की शिकायत
- स्वास्थ्य सेवाओं की कमी के कारण ग्रामीण झाड़-फूंक के चक्कर में पड़ रहे
- सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से कार्रवाई की मांग उठाई
गांवों में फैल रहा अंधविश्वास का जाल
हरदोई जिले के कोतवाली कछौना क्षेत्र के कई गांवों में कथित तांत्रिकों और झाड़-फूंक करने वाले बाबाओं के डेरे तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार कई स्थानों पर इन लोगों ने स्थायी रूप से अपने अड्डे बना लिए हैं, जहां बीमारियों, पारिवारिक समस्याओं और आर्थिक परेशानियों का समाधान तंत्र-मंत्र और झाड़-फूंक के जरिए करने का दावा किया जाता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इन तथाकथित बाबाओं के पास रोजाना बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। कई ग्रामीण अपनी समस्याओं के समाधान के लिए ताबीज, भभूत और अन्य तथाकथित धार्मिक उपायों के नाम पर पैसे भी खर्च कर देते हैं।
📌 क्या है पूरा मामला?
- कछौना क्षेत्र में झाड़-फूंक और तंत्र-मंत्र करने वालों की संख्या बढ़ने की शिकायत
- बीमारियों और समस्याओं का इलाज बताकर ग्रामीणों से वसूली
- स्वास्थ्य सेवाओं की कमी का उठाया जा रहा फायदा
- सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की
स्वास्थ्य व्यवस्था की कमी का उठा रहे फायदा
ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं पर्याप्त नहीं हैं और निजी डॉक्टरों की फीस भी कई लोगों के लिए महंगी साबित होती है। ऐसे में कई लोग मजबूरी में इलाज के लिए इन कथित तांत्रिकों के पास पहुंच जाते हैं।
ये तथाकथित बाबा बुखार, मिर्गी, मानसिक रोगों और यहां तक कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों तक का इलाज ताबीज, भभूत और झाड़-फूंक से करने का दावा करते हैं। मनोवैज्ञानिक दबाव और डर का माहौल बनाकर ग्रामीणों को इस कदर भ्रमित कर दिया जाता है कि वे अपनी मेहनत की कमाई तक इनके हाथों सौंप देते हैं।
महिलाओं के उत्पीड़न की भी चर्चाएं
ग्रामीणों के अनुसार कई मामलों में महिलाओं के साथ मानसिक उत्पीड़न और प्रताड़ना की चर्चाएं भी सामने आती रही हैं। हालांकि सामाजिक भय और अंधविश्वास के कारण लोग खुलकर शिकायत करने से कतराते हैं।
कई परिवार इन घटनाओं को ‘ऊपरी साया’ या ‘ईश्वरीय कोप’ मानकर चुप्पी साध लेते हैं, जिससे ऐसे मामलों में कार्रवाई करना और भी मुश्किल हो जाता है।
🔎 अब आगे क्या होगा?
- सामाजिक संगठनों द्वारा प्रशासन से जांच और कार्रवाई की मांग
- क्षेत्र में चल रहे कथित तांत्रिक अड्डों की जांच संभव
- ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए अभियान चलाया जा सकता है
- स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाओं को मजबूत करने पर जोर
सामाजिक संगठनों ने उठाए सवाल
इस मामले में क्षेत्रीय विकास जन आंदोलन के संयोजक रामखेलावन कनौजिया ने प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह केवल ठगी नहीं बल्कि मानवता के खिलाफ अपराध है। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में इस तरह का पाखंड सरकारी तंत्र की विफलता को दर्शाता है।
उन्होंने प्रशासन से मांग की कि ऐसे तथाकथित डेरों और तांत्रिकों के खिलाफ छापेमारी कर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भोले-भाले ग्रामीणों को इस तरह की ठगी से बचाया जा सके।
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