Kushinagar Kavi Sammelan: “के ही मारेला भरि पिचकारी…” पर झूमे श्रोता, होली मिलन में उड़े फाग के रंग

कुशीनगर, ममता तिवारी | वेब वार्ता

Kushinagar Kavi Sammelan के तहत विमर्श साहित्यिक सामाजिक सेवा संस्था द्वारा आयोजित मासिक काव्य गोष्ठी एवं होली मिलन समारोह में फागुनी रस की ऐसी बौछार हुई कि सभागार सरा-रा-रा की गूंज से गूंज उठा। 2 मार्च को तहसील क्षेत्र के साखोपार स्थित नवल किशोर सिंह स्मृति संस्थान के सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में कवियों की रसभरी प्रस्तुतियों पर श्रोता झूमते नजर आए। बसंती रंगों और हास्य-व्यंग्य से सजी इस संध्या ने साहित्य प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

Kushinagar Kavi Sammelan का शुभारंभ अतिथियों द्वारा मां सरस्वती के चित्र पर पुष्प अर्पित कर किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत अश्वनी द्विवेदी की सरस्वती वंदना से हुई, जिसने वातावरण को आध्यात्मिक रंग में रंग दिया।

Kushinagar Kavi Sammelan में फागुनी गीतों की छटा

काव्य गोष्ठी में मोहन पांडेय ‘भ्रमर’ की प्रस्तुति “के ही मारेला भरि पिचकारी, भींजत मोर सारी” पर श्रोता झूम उठे। रूबी गुप्ता सत्येंद्र ने “अपने नापाक इरादों से बगावत कीजे” सुनाकर सामाजिक चेतना का स्वर बुलंद किया। वरिष्ठ कवि डॉ. ओम प्रकाश द्विवेदी ‘ओम’ की रचना “सखी री, बसंत आगमन स्वागत को उत्सुक मेरी अंखियां” को खूब सराहना मिली।

  • उमेश चौबे ‘अश्क’ – “चढ़ल मास फागुन के जबसे…”
  • सत्य प्रकाश शुक्ला ‘बाबा’ – “चली खेलन सजि धजि होरी गोरी…”
  • डॉ. रानी शुक्ला – “मैं कैसे कहूं यह मोहब्बत नहीं है…”
  • आकाश महेशपुरी – “नेता नोटों की गड्डी से खेल रहे हैं”
  • डॉ. मधुसूदन पांडेय – “आइल फागुन महीनवा के दिनवा…”

हास्य-व्यंग्य और सामाजिक सरोकारों का संगम

Kushinagar Kavi Sammelan में ब्रजेश मणि त्रिपाठी की “पड़ी रंगों से है, फीकी मेरे जज्बात की होली” ने संवेदनशीलता का रंग भरा। डॉ. बलराम राय ने “कहां गई हुड़दंग होली” के माध्यम से बदलते परिवेश पर प्रश्न उठाए। वहीं नंदलाल सिंह ‘कांतिपति’ ने महंगाई पर कटाक्ष करते हुए लोगों को सोचने पर विवश किया।

मुख्य अतिथिविशेष भूमिका
डॉ. सिद्धार्थ मणि त्रिपाठीप्रदेश अध्यक्ष, विश्व भोजपुरी सम्मेलन
डॉ. जयति ओझा (दिल्ली)मुख्य वक्ता, “चलो मिलकर कहानी लिखते हैं”

साहित्य सृजन और प्रकाशन पर जोर

उदित नारायण स्नातकोत्तर महाविद्यालय के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. रामनरेश दूबे, प्रधानाचार्य परिषद के प्रदेश मंत्री शैलेंद्र दत्त शुक्ला और अखिलेश गोयल ने साहित्य सृजन के संरक्षण और कवियों की रचनाओं के संकलन-प्रकाशन पर बल दिया। संस्था अध्यक्ष आरके भट्ट और अन्य पदाधिकारियों ने अतिथियों एवं कवियों को सम्मान पत्र देकर सम्मानित किया।

Kushinagar Kavi Sammelan में हरेंद्र नाथ पांडेय, विजय कुमार तिवारी, ज्योति भान मिश्र, कृष्ण नन्द पांडेय, नीरज साहा, पवन मिश्रा सहित बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि साहित्य और संस्कृति के माध्यम से समाज में सकारात्मक ऊर्जा और समरसता का संचार किया जा सकता है।

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