लखनऊ, अजय कुमार | वेब वार्ता
हिन्दू जागरण समिति कैन्ट, लखनऊ के विशेष आमंत्रण पर आयोजित RSS हिन्दू सम्मेलन में श्री श्री राधा रमण बिहारी मंदिर (इस्कॉन) के अध्यक्ष अपरिमेय श्याम प्रभु ने जीवन में श्रीमद्भगवद्गीता के शाश्वत महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं और स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए उन्होंने भारतीय आध्यात्मिक परंपरा की निरंतरता, नैतिक मूल्यों और धर्म के मूल स्वरूप पर विचार प्रस्तुत किए।
गीता की शाश्वतता पर केंद्रित रहा संबोधन
अपरिमेय श्याम प्रभु ने अपने वक्तव्य में कहा कि गीता किसी एक कालखंड की रचना नहीं, बल्कि शाश्वत आध्यात्मिक ज्ञान का स्रोत है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जब 500 वर्ष पहले गुरु ग्रंथ साहब, 1400 वर्ष पहले कुरान और 2000 वर्ष पहले बाइबिल का अस्तित्व नहीं था, तब भी धर्म और आध्यात्मिक शिक्षा मौजूद थी। उस समय भी गीता थी, जो आज से करोड़ों वर्षों पूर्व से मानवता का मार्गदर्शन करती आ रही है।
समाज में अच्छे और बुरे के भेद को समझने का संदेश
प्रभु जी ने हनुमान जी के जीवन का उदाहरण देते हुए समाज में नैतिक स्पष्टता की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि समाज में मूलतः दो ही प्रकार के लोग होते हैं — अच्छे और बुरे। अच्छे लोगों का साथ देना और बुरे कर्मों के विरुद्ध दृढ़ता से खड़ा होना ही धर्म का वास्तविक स्वरूप है। यह संदेश सामाजिक संतुलन और नैतिक उत्तरदायित्व की भावना को मजबूत करता है।
गुरु परंपरा के माध्यम से गीता अध्ययन पर जोर
अपने संबोधन के अंतिम चरण में अपरिमेय श्याम प्रभु ने सभी से आग्रह किया कि गीता का अध्ययन गुरु के मार्गदर्शन में करें। उन्होंने कहा कि गीता केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि मनुष्य जीवन के वास्तविक उद्देश्य, कर्तव्य और आत्मबोध का मार्ग प्रशस्त करती है। गीता के सिद्धांत व्यक्ति को आत्मिक शांति, नैतिक शक्ति और सामाजिक उत्तरदायित्व की दिशा दिखाते हैं।
कार्यक्रम से जुड़ी प्रमुख जानकारी
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| कार्यक्रम | RSS हिन्दू सम्मेलन |
| आयोजक | हिन्दू जागरण समिति, कैन्ट |
| स्थान | लखनऊ |
| मुख्य वक्ता | अपरिमेय श्याम प्रभु (इस्कॉन) |
| तिथि | 25 जनवरी 2026 |
निष्कर्ष
RSS हिन्दू सम्मेलन में दिया गया यह संबोधन भारतीय आध्यात्मिक परंपरा की गहराई और निरंतरता को रेखांकित करता है। गीता के माध्यम से जीवन के उद्देश्य, नैतिकता और कर्तव्यबोध पर दिया गया संदेश समाज में सकारात्मक चिंतन और आत्ममंथन को प्रेरित करता है।
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