ग्वालियर, मुकेश शर्मा | वेब वार्ता
भिंड में भाजपा नेता यश उपाध्याय की फर्म मैसर्स यश उपाध्याय पर फर्जी भुगतान का गंभीर आरोप लगा है। आरोप है कि फर्म ने दीनदयाल योजना और सौभाग्य विद्युत योजना के अंतर्गत 11 केवी विद्युत लाइन, ट्रांसफार्मर एवं एल.टी. लाइन कार्य के लिए टेंडर और वर्क ऑर्डर तो प्राप्त किए, लेकिन अधिकांश स्थानों पर काम नहीं किया गया। इसके बावजूद फर्जी बिल लगाकर बिजली विभाग से भुगतान प्राप्त कर लिया गया।
काम किसी और ने किया, भुगतान यश उपाध्याय की फर्म को
शिकायत में बताया गया है कि ग्वालियर निवासी यश उपाध्याय स्वयं को भाजपा नेता बताते हैं। उनकी फर्म को जिन मीटर और ट्रांसफार्मर लगाने के ऑर्डर जारी किए गए, उनमें क्रमांक 7110, 7046, 7047, 7100, 8058, 7163, 7059, 7084, 8146, 8048, 8088, 7353, 7111, 7503, 7081, और 7578 शामिल हैं। आरोप है कि इन ऑर्डरों के तहत न तो मीटर लगाए गए और न ही कोई वास्तविक कार्य हुआ, फिर भी विभाग से भुगतान करवा लिया गया। यह पूरा मामला सत्ता के प्रभाव और विभागीय मिलीभगत की ओर इशारा करता है।
भ्रष्टाचार की शिकायत मुख्यमंत्री तक पहुँची
इस मामले में भिंड निवासी राजीव पाठक ने उच्च अधिकारियों और मुख्यमंत्री से शिकायत की है। शिकायत में कहा गया है कि विभाग द्वारा जारी टेंडर और वर्क ऑर्डर क्रमांक 7503, 9108, 9107, 9174, 9175, 9176, 9297, 9177, 9096, 9097, 9160, 9169, 9168, 9181, 9208 और 9203 के तहत भी फर्जी बिल प्रस्तुत किए गए। कई स्थानों पर पुरानी लाइन को नया दिखाकर बिलिंग की गई, जबकि कुछ क्षेत्रों में ट्रांसफार्मर लगाए ही नहीं गए। इतना ही नहीं, वर्क ऑर्डर नंबर 9174 और 9177 का कार्य पहले ही एमडीपी कंपनी द्वारा किया जा चुका था, लेकिन उसी का भुगतान भी यश उपाध्याय की फर्म ने प्राप्त कर लिया।
- 11 केवी लाइन और ट्रांसफार्मर कार्य के लिए फर्जी बिल लगाकर भुगतान लिया गया।
- कई जगह पुरानी लाइनों को नया दिखाकर भुगतान कराया गया।
- मुख्यमंत्री और विभागीय अधिकारियों से जांच की मांग की गई है।
फर्जी बिलिंग और विभागीय मिलीभगत की आशंका
शिकायतकर्ता ने कहा है कि बिजली विभाग के कुछ अधिकारी फर्म के साथ मिलीभगत में हैं, जिन्होंने बिना कार्य सत्यापन किए भुगतान कर दिया। यह मामला गंभीर वित्तीय अनियमितता और भ्रष्टाचार का प्रतीक है। यदि जांच निष्पक्ष हुई तो कई अधिकारी और संबंधित फर्म जिम्मेदार पाए जा सकते हैं।
निष्कर्ष: सत्ता के प्रभाव में भ्रष्टाचार का नया उदाहरण
भाजपा से जुड़ी मानी जा रही मैसर्स यश उपाध्याय फर्म पर लगे ये आरोप सरकार और विभाग दोनों के लिए चुनौती बन गए हैं। बिजली विभाग में सत्ता और संबंधों के दम पर फर्जी भुगतान का यह मामला पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है। शिकायतकर्ता ने निष्पक्ष जांच की मांग की है ताकि जिम्मेदारों पर कार्रवाई हो सके और विभागीय भ्रष्टाचार पर अंकुश लगे।
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