Monday, January 26, 2026
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उपेक्षा का शिकार 200 साल पुराना महेश बाबा मंदिर, जीर्णोद्धार व पर्यटन स्थल बनाने की मांग तेज

हरदोई, लक्ष्मीकान्त पाठक | वेब वार्ता

हरदोई जनपद के कछौना विकासखंड अंतर्गत ग्राम सभा समसपुर के महेशन मढ़िया गांव में स्थित लगभग 200 वर्ष पुराना महेश बाबा मंदिर लंबे समय से उपेक्षा का शिकार है। देखरेख के अभाव में यह प्राचीन और पौराणिक धार्मिक स्थल अपनी पहचान खोता जा रहा है, जिससे स्थानीय लोगों में गहरी चिंता व्याप्त है।

देखरेख के अभाव में मंदिर परिसर पर अवैध कब्जा

स्थानीय लोगों के अनुसार, मंदिर की नियमित देखरेख न होने के कारण परिसर पर असामाजिक और गलत तत्वों का कब्जा होता जा रहा है। मंदिर का प्राचीन ठाकुर द्वार जर्जर अवस्था में पहुंच चुका है, जबकि परिसर में स्थित अन्य संरचनाएं भी क्षतिग्रस्त हो रही हैं। इससे यह ऐतिहासिक धरोहर धीरे-धीरे नष्ट होने की कगार पर है।

200 वर्ष पुराना पौराणिक धार्मिक स्थल

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, लगभग 200 वर्ष पूर्व बाबा राघव दास के गुरु महंत द्वारा महेश बाबा मंदिर की स्थापना की गई थी। यह मंदिर न केवल आस्था का केंद्र रहा है, बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। पूर्वजों के अनुसार, बागों से घिरे होने के कारण यह स्थल ऐतिहासिक काल में भी सुरक्षित रहा।

राजस्व अभिलेखों में हेराफेरी का आरोप

बताया गया कि मंदिर के रखरखाव के लिए ग्राम समसपुर सहित आसपास के गांव—महारी, बर्राघूमन, कटका और सहोरिया—की भूमि राजस्व अभिलेखों में मंदिर के नाम दर्ज थी। कालांतर में बाबा राघव दास की मृत्यु के बाद यह भूमि उनके शिष्यों के नाम स्थानांतरित कर दी गई और शिष्यों की मृत्यु के उपरांत उनके पुत्रों के नाम गलत तरीके से दर्ज कर दी गई।

12 एकड़ मंदिर भूमि को बाग में बदलने का दावा

स्थानीय जानकारों का कहना है कि मंदिर परिसर की लगभग 12 एकड़ भूमि को बाग के रूप में परिवर्तित कर लिया गया है। इससे न केवल मंदिर की संपत्ति पर संकट खड़ा हुआ है, बल्कि इसके धार्मिक और ऐतिहासिक स्वरूप को भी नुकसान पहुंचा है।

दुर्लभ शिव-पार्वती प्रतिमा मौजूद

मंदिर परिसर के ठाकुर द्वार में स्थित हनुमान मंदिर और राम-जानकी मंदिर भी वर्तमान में जीर्ण-शीर्ण अवस्था में हैं। इस स्थल पर खंडित शिव-पार्वती की दुर्लभ प्रतिमा स्थापित है। जनश्रुतियों के अनुसार, इस प्रकार की शिल्पकला वाले केवल दो ही मंदिर पूरे देश में बताए जाते हैं, जिससे इसका महत्व और बढ़ जाता है।

  • मंदिर की स्थापना लगभग 200 वर्ष पूर्व की गई
  • मंदिर परिसर की करीब 12 एकड़ भूमि पर विवाद
  • हनुमान और राम-जानकी मंदिर भी जर्जर हालत में
  • दुर्लभ शिव-पार्वती प्रतिमा का संरक्षण आवश्यक
  • पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की मांग

मुख्यमंत्री को भेजा गया पत्र

मंदिर के जीर्णोद्धार और कायाकल्प की मांग को लेकर जन सरोकार मंच द्वारा सभापति अशोक अग्रवाल से अनुरोध किया गया। इस संबंध में अशोक अग्रवाल ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर मंदिर के संरक्षण, अवैध कब्जा हटाने और इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की मांग की है।

इस पूरे प्रकरण की जानकारी डॉक्टर वेद मिश्र, सुरेंद्र सिंह (निवासी सेमरा कला), ग्राम प्रधान अनूप कुमार, जन सरोकार मंच के संयोजक पी.डी. गुप्ता और पूर्व मंडल अध्यक्ष नवीन पटेल द्वारा सभापति को दी गई। सभी ने एक स्वर में इस ऐतिहासिक धरोहर को बचाने के लिए शीघ्र ठोस कार्रवाई की मांग की है।

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