उत्तरायणी कौथिग 2026 के चौथे दिन भाना गंगनाथ लोकगाथा की नृत्य नाटिका ने बांधा समां

लखनऊ, अजय कुमार | वेब वार्ता

पर्वतीय महापरिषद लखनऊ द्वारा आयोजित उत्तरायणी कौथिग 2026 के रजत जयंती वर्ष के चतुर्थ दिवस में सांस्कृतिक और लोक परंपराओं का मनमोहक संगम देखने को मिला। पं. गोविंद बल्लभ पंत पर्वतीय सांस्कृतिक उपवन के कौथिग मंच पर “भाना गंगनाथ” लोक गाथा पर आधारित नृत्य नाटिका का मंचन हुआ, जिसने मुख्य अतिथि रीता बहुगुणा जोशी सहित पूरे जनमानस को अभिभूत कर दिया। यह प्रस्तुति उत्तराखंडी जनकल्याण समिति विकास नगर लखनऊ द्वारा चंचल सिंह बोरा के निर्देशन में दी गई।

लोकनृत्य और झोड़ा प्रतियोगिताओं ने मोहा मन

दिनभर कौथिग मैदान में कल्याणपुर, एलडीए कानपुर रोड और वृंदावन से आए झोड़ा दलों ने पारंपरिक गढ़वाली, जोनसारी, रं, जोहारी, कुमाऊंनी और थारू समाज की संस्कृति को प्रस्तुत किया। पुष्पा जोशी, वीना रावत, बसंती बिष्ट और प्रेम सिंह बिष्ट के नेतृत्व में लगभग 200 महिलाओं ने पारंपरिक परिधानों और गहनों में झोड़ा नृत्य प्रस्तुत किया, जिससे मैदान रंग-बिरंगे उत्सव में बदल गया। तत्पश्चात झोड़ा प्रतियोगिता में विभिन्न दलों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया। हास्य कवि भुवन जहाँवासी की कविता “मार बेलन की…” ने दर्शकों को खूब गुदगुदाया।

स्वास्थ्य शिविर और आर्गेनिक उत्पादों ने खींचा ध्यान

कौथिग स्थल पर स्टॉल नंबर 89 पर उत्तराखंड के शुद्ध और ऑर्गेनिक उत्पाद जैसे खुमानी, पुलम, आड़ू, सेब के जैम, बुरांश जूस और हर्बल टी विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। हरीश बिष्ट (रामगढ़, नैनीताल) ने बताया कि ये उत्पाद हृदय, किडनी और पाचन तंत्र के लिए लाभकारी हैं। साथ ही, पर्वतीय महापरिषद चिकित्सा प्रकोष्ठ और मुख्य चिकित्सा कार्यालय के संयुक्त तत्वावधान में निःशुल्क स्वास्थ्य परामर्श शिविर आयोजित किया गया, जिसमें डॉ. राहुल तिवारी को विशेष रूप से सम्मानित किया गया।

मुख्य अतिथि रीता बहुगुणा जोशी ने किया दीप प्रज्ज्वलन

सायंकालीन सत्र में पूर्व कैबिनेट मंत्री व वरिष्ठ भाजपा नेता रीता बहुगुणा जोशी ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। महिला प्रकोष्ठ प्रभारी सुमन रावत, अध्यक्ष जानकी अधिकारी और मुख्य संयोजक मंजू पडेलिया ने पुष्पगुच्छ भेंट कर मुख्य अतिथि का स्वागत किया। इस अवसर पर नरेंद्र सिंह देवड़ी को “गोविंद सिंह नयाल समाज सेवा सम्मान” से सम्मानित किया गया। सांस्कृतिक मंच पर साहित्यकारों, रंगकर्मियों और मीडिया प्रतिनिधियों की भी उल्लेखनीय उपस्थिति रही।

  • राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त रंगकर्मी ललित पोखरिया का विशेष स्वागत किया गया।
  • “पहाड़ी धुनों पर देसी ठुमका” और “पहाड़ की आवाज़” प्रतियोगिताओं में युवा प्रतिभाओं ने धमाल मचाया।
  • लोकगायक गोविंद दिगारी, संजय पथनी और मनोज सामंत के गीतों ने समां बाँध दिया।

कल के कार्यक्रमों की झलक

18 जनवरी को गोविंद दिगारी के लोकगीतों की विशेष प्रस्तुति होगी। इसके साथ ही झोड़ा प्रतियोगिताएं, “पहाड़ी धुनों पर देसी ठुमका” प्रतियोगिता, “पहाड़ की आवाज़” गायन प्रतियोगिता और “छपेली झुमिगो सीजन-4” का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम का संचालन नीलम जोशी और गोविंद बोरा ने किया।

निष्कर्ष: उत्तराखंड की संस्कृति से सराबोर रहा कौथिग

उत्तरायणी कौथिग का चतुर्थ दिवस उत्तराखंड की लोक संस्कृति, संगीत और कला का जीवंत प्रतीक बन गया। भाना गंगनाथ की लोकगाथा पर आधारित नृत्य नाटिका ने दर्शकों के मन को छू लिया, जबकि पारंपरिक झोड़ा नृत्य और लोकगीतों ने कौथिग को एक यादगार अनुभव बना दिया।

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