वाराणसी में सीएम योगी बोले — काशी को बदनाम करने वालों के खिलाफ सख्त संदेश, “58 हज़ार करोड़ से बन रही भारत की नई सांस्कृतिक पहचान”

वाराणसी, अजय कुमार | वेब वार्ता

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को वाराणसी में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि उन्हें “खास उद्देश्य से प्रेस कॉन्फ्रेंस करनी पड़ी” है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग भारत की प्राचीन विरासत को बदनाम करने और काशी के विकास कार्यों में बाधा डालने की सुपारी लेकर सक्रिय हैं। सीएम योगी ने कहा कि काशी में चल रही विकास परियोजनाओं के खिलाफ दुष्प्रचार चलाया जा रहा है, जबकि सच्चाई यह है कि काशी आज नई ऊंचाइयों को छू रही है।

“काशी अविनाशी है, भारत की आत्मा है”

योगी ने कहा — “काशी अविनाशी है। हर भारतवासी काशी के प्रति अपार श्रद्धा रखता है। यह केवल एक शहर नहीं, बल्कि भारत की आत्मा है। देश की संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी काशी का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने शुरुआत में ही कहा था कि पुरातन मान्यताओं और परंपराओं को संरक्षित रखते हुए ही भौतिक विकास होगा।”

मुख्यमंत्री ने बताया कि 58 हज़ार करोड़ रुपये की परियोजनाओं के जरिए काशी का अभूतपूर्व विकास हो रहा है। पिछले 11 वर्षों में काशी को वैश्विक पहचान मिली है। आज काशी की सभी सड़कें फोर लेन से जुड़ी हैं, देश के हर बड़े शहर से ट्रेन कनेक्टिविटी उपलब्ध है, और भारत का पहला रोपवे प्रोजेक्ट भी यहीं बन रहा है।

“2014 के बाद गंगा का जल हुआ पवित्र, घाट हुए भव्य”

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पहले काशी में गंगा का जल स्नान योग्य नहीं था, लेकिन अब गंगा इतनी स्वच्छ है कि लोग आचमन और स्नान दोनों कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि 2014 के बाद से काशी के घाट न केवल सुंदर बने हैं बल्कि उन्हें आध्यात्मिक और पर्यटन दोनों दृष्टि से विकसित किया गया है। काशी तमिल संगमम जैसे आयोजन भारत की सांस्कृतिक एकता के प्रतीक हैं।

“पहले केवल 5 श्रद्धालु कर पाते थे दर्शन, आज एक साथ 50 हज़ार”

मुख्यमंत्री ने कहा — “पहले विश्वनाथ मंदिर में एक समय में पांच लोग दर्शन कर पाते थे, आज पचास हज़ार श्रद्धालु एक साथ दर्शन कर सकते हैं। यह बदलाव बताता है कि कैसे प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में काशी की भव्यता और अध्यात्मिक गरिमा दोनों को नई पहचान मिली है।”

“झूठ फैलाने वालों को जवाब देना ज़रूरी था”

सीएम योगी ने कहा कि कुछ लोग काशी को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। “जब काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का काम शुरू हुआ था, तब भी इन्हीं लोगों ने विकास के खिलाफ साजिश की थी। आज वही लोग टूटी मूर्तियों की पुरानी तस्वीरें सोशल मीडिया पर डालकर यह भ्रम फैला रहे हैं कि नई मूर्तियाँ तोड़ी जा रही हैं। इससे बड़ा सफेद झूठ और कुछ नहीं हो सकता।”

“काशी की नई वैश्विक पहचान, विरासत और विकास का संगम”

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज काशी केवल एक धार्मिक नगरी नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक राजधानी बन चुकी है। “प्रधानमंत्री मोदी ने हमेशा इस बात पर ज़ोर दिया कि काशी की प्राचीन विरासत को संरक्षित रखते हुए इसे देश और दुनिया के सामने नए स्वरूप में प्रस्तुत किया जाए। आज काशी की यह पहचान पूरे विश्व में गूंज रही है।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि 2014 के बाद से काशी ने शिक्षा, स्वास्थ्य, आधारभूत ढांचे, पर्यटन और धार्मिक आस्था के हर क्षेत्र में तेज़ी से प्रगति की है। “यह बदलाव न केवल भौतिक विकास का प्रतीक है, बल्कि भारत की आत्मिक चेतना और गर्व का भी प्रमाण है।”

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