पटना, राजनीतिक डेस्क | वेब वार्ता
बिहार की राजनीति में एक बार फिर भावनाओं और संकेतों की राजनीति चर्चा में है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने बड़े बेटे तेज प्रताप यादव को आशीर्वाद देकर उनके दही-चूड़ा भोज को खास बना दिया। लालू यादव का इस भोज में सबसे पहले पहुंचना सियासी गलियारों में कई मायनों में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि यह कदम तेज प्रताप यादव के लिए न सिर्फ भावनात्मक राहत है, बल्कि उनके राजनीतिक भविष्य के लिए भी एक अहम संकेत हो सकता है।
दही-चूड़ा भोज में दिखी सियासी विविधता
तेज प्रताप यादव के दही-चूड़ा भोज में राजनीति की सीमाएं टूटती नजर आईं। राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा समेत बिहार सरकार के कई मंत्री इस भोज में शामिल हुए। निमंत्रण में किसी पार्टी या विचारधारा की दीवार नजर नहीं आई। हालांकि, जिन नेताओं को बुलाया गया था, उनमें से कई बड़े चेहरे कार्यक्रम में नहीं पहुंचे।
लालू यादव की मौजूदगी सबसे बड़ा संदेश
आज मकर संक्रांति के पावन अवसर पर आयोजित “ऐतिहासिक दही-चूड़ा भोज” में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री, सामाजिक न्याय के पुरोधा एवं हमारे पिताजी आदरणीय पूजनीय श्री लालू प्रसाद यादव जी का आगमन हुआ।
अपने पिताजी श्री लालू प्रसाद यादव जी का पूरे हर्षोल्लास और गर्मजोशी के साथ अंगवस्त्र भेंट… pic.twitter.com/4nhx9UvRJZ
— Tej Pratap Yadav (@TejYadav14) January 14, 2026
भोज की सबसे अहम बात रही लालू यादव की मौजूदगी। वे कार्यक्रम में सबसे पहले पहुंचे और तेज प्रताप को आशीर्वाद दिया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह संकेत है कि लालू यादव ने अपने बड़े बेटे को मन से माफ कर दिया है। हालांकि, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव का भोज में शामिल न होना भी अपने आप में एक राजनीतिक संदेश माना जा रहा है।
- लालू यादव का सबसे पहले भोज में पहुंचना
- राज्यपाल और डिप्टी सीएम की मौजूदगी
- तेजस्वी यादव और राबड़ी देवी की गैरहाजिरी
तेजस्वी यादव के न आने पर तेज प्रताप का बयान
बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव के कार्यक्रम में न पहुंचने पर तेज प्रताप यादव ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि निमंत्रण पत्र दे दिया गया है, वे छोटे भाई हैं और थोड़ा देर से उठते हैं, वे भी आएंगे। इस बयान को भाईचारे की सार्वजनिक कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
बीता साल रहा था तेज प्रताप के लिए मुश्किल
वर्ष 2025 तेज प्रताप यादव के लिए बेहद कठिन रहा। निजी तस्वीरों के सोशल मीडिया पर सामने आने और निजी जीवन को लेकर विवादों के बाद लालू यादव ने उन्हें राजद से निष्कासित कर दिया था। इसके बाद तेज प्रताप ने अपनी अलग पार्टी जनशक्ति जनता दल बनाई और महुआ विधानसभा सीट से चुनाव भी लड़े, लेकिन करारी हार का सामना करना पड़ा। चुनाव के दौरान दोनों भाइयों के बीच खुली सियासी टकराहट भी देखने को मिली।
क्या यह तेज प्रताप की घर वापसी है?
लालू यादव की दही-चूड़ा भोज में मौजूदगी को कुछ लोग तेज प्रताप यादव की घर वापसी के रूप में देख रहे हैं। हालांकि, अभी इसे पूरी वापसी कहना जल्दबाजी होगी। राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव की गैरहाजिरी यह संकेत देती है कि परिवार और राजनीति—दोनों स्तरों पर समीकरण अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुए हैं।
दही-चूड़ा भोज हिट या फ्लॉप?
भोज में कई बड़े नेता नहीं पहुंचे, जिनमें एनडीए और जदयू के कई प्रमुख नाम शामिल हैं। इसके बावजूद लालू यादव और राज्यपाल की मौजूदगी ने कार्यक्रम का वजन बढ़ा दिया। राजनीतिक तराजू में एक पलड़े पर लालू यादव का आशीर्वाद है, तो दूसरे पर बाकी नेताओं की गैरहाजिरी। कुल मिलाकर तेज प्रताप यादव के लिए यह भोज सियासी रूप से पूरी तरह फ्लॉप नहीं कहा जा सकता।
निष्कर्ष: आशीर्वाद ने बदला माहौल
तेज प्रताप यादव को सब कुछ वापस मिले या न मिले, लेकिन पिता लालू यादव का आशीर्वाद मिलना उनके लिए बड़ी राजनीतिक और भावनात्मक पूंजी है। दही-चूड़ा भोज ने यह साफ कर दिया कि बिहार की राजनीति में रिश्ते, संकेत और प्रतीक आज भी उतने ही असरदार हैं जितनी सीधी चुनावी लड़ाई।
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